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शिक्षा विभाग बना भ्रष्टाचार का गढ़, बच्चों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजना में हो रहा जमकर बंदरबांट - बाबूलाल अग्रवाल

शिक्षा विभाग बना भ्रष्टाचार का गढ़, बच्चों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजना में हो रहा जमकर बंदरबांट - बाबूलाल अग्रवाल


 क्लेक्टर सीईओ कर रहे करोडों के घोटाला की लीपापोती

सूरजपुर, 25 फरवरी। भाजपा जिला अध्यक्ष बाबुलाल अग्रवाल ने प्रेस वार्ता कर सूरजपुर जिले में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न विद्यालयों में अधिकारियों द्वारा सरकार के संरक्षण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है। 

भाजपा ने कहा कि जिले में विभिन्न विद्यालयों में 1500 से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा मध्यान्ह भोजन का संचालन किया जाता था। जिसमें जिले की लगभग 15000 महिलायें रोजगार के लिये लाभान्वित हो रही थी। लेकिन कोरोना संक्रमण काल में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में मध्यान्ह भोजन संचालन का काम समूह से छीनकर बगैर किसी स्पष्ट आदेश के निजी सप्लायर को दे दिया गया। 

जिससे जिले की लगभग 1500 महिला स्वयं सहायता समूह के हाथ से काम छिन गया है।  सामाग्री आपूर्तिकर्ता द्वारा अमानक स्तर का खाद्य सामाग्री जिले के स्कूलों में सप्लाई किया जा रहा है। जिसकी क्वालिटी अत्यंत खराब होने के कारण वह सामाग्री बच्चों के खाने योग्य नहीं है। स्कूलों में प्रदाय की गई दाल व सोयाबड़ी अत्यंत ही घटिया है। अचार के नाम पर बच्चों को सडे - गले मिर्च का पेस्ट बनाकर बांटा जा रहा है। समूह से काम छिनने के कारण व सामाग्री आपूर्ति को एक सप्लायर से केन्द्रीयकृत करने के कारण स्थानीय फुटकर व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है। 

भाजपा जिला अध्यक्ष श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर से जानकारी मांगे जाने पर उनके द्वारा पिछले दो माह से टाल मटोल किया जा रहा है। इसी प्रकार स्कूल शिक्षा विभाग में पिछले शिक्षा सत्र में जिले के 111 संकूलों के लिए 1,35,000 रूपये प्रति संकुल के मान से राशि आवंटित की गई थी। जिसका स्थानीय आवश्यकता अनुसार संकुल प्रभारी द्वारा सामाग्री खरीदी पर व्यय किया जाना था किन्तु विभागीय अधिकारियों द्वारा सत्ता के संरक्षण में दबाव पूर्वक संकुल प्रभारियों से 80,000 / - ( अस्सी हजार ) रूपये का चेक ले लिया गया तथा गैर जरूरी फर्नीचर की आपूर्ति संकूलों में कर दी गई। जिसकी क्वालिटी अत्यंत घटिया थी। फर्नीचर आपूर्तिकर्ता द्वारा बगैर संकुल प्रभारी की सहमति से मनमानी फर्नीचर सप्लाई किया गया। जिसका अब तक कोई उपयोग नहीं हो रहा है। इस मामले को जिला पंचायत सदस्यों द्वारा जिला पंचायत की सामान्य सभा में उठाकर मामले की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर उचित कार्यवाही करते हुये भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी। 

लेकिन जाँच के नाम पर लीपापोती कर मामले को रफा दफा कर दिया गया। इसी प्रकार एक बार पुनः स्कूल शिक्षा मंत्री के गृह जिले में संकुलों का पुर्नगठन कर संकुलों की संख्या 111 से बढ़ाकर 242 कर दी गई तथा प्रति संकुल के मान से 1,35,000  रूपये राशि जारी करने की तैयारी हैं , इस बार संकुलों के खाते में सीधे जाने वाली राशि खण्ड स्त्रोत समन्वयकों (बी.आर.सी) के खाते में डालकर राशि के बंदरबांट की योजना बनाई जा रही है । विभागीय अधिकारी व आपूर्तिकर्ता द्वारा मिली भगत कर करोड़ों रूपये का भ्रष्टचार किया जा रहा है। 

श्री अग्रवाल आगे कहते है कि इस प्रकार देखा जाय तो सिर्फ सूरजपुर जिले में कई करोड़ रूपये की राशि का भ्रष्टाचार किया जा रहा है तो सहज ही पूरे प्रदेश में हो रहे संगठित भ्रष्टाचार का अनुमान लगाया जा सकता है । भारतीय जनता पार्टी मांग करती है कि प्रदेश सरकार व स्कूल शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह इस मामले का संज्ञान लेकर मध्यान्ह भोजन संचालन महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कराने व संकुलों के लिये आबंटित राशि को संकुल प्रभारी के माध्यम से उपयोग कराया जाये और उचित कार्यवाही न होने पर भाजपा द्वारा महामहिम राज्यपाल महोदय व केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा जायेगा।