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बस्तर की मेडिकल व्यवस्था आई सी यू में क्यों? जवाब दे सरकार-मुक्तिमोर्चा

बस्तर की मेडिकल व्यवस्था आई सी यू में क्यों? जवाब दे सरकार-मुक्तिमोर्चा

जगदलपुर। बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के सम्भागीय सयोजक नवनीत चाँद व जिला सयोजक भरत कश्यप ने बयान जारी करते हुए कहा कि बस्तर की मेडिकल व्यवस्था पूरी तरह से आई सी यू में पहुच गई है। जिसका जिसका उदहारण विगत दिनों ,बस्तर सम्भागीय मुख्यालय जगदलपुर में एक निजी अस्पताल में गम्भीर रूप से बीमार 22 वर्षीय बालिका गायत्री सेठिया की मृत्यु रास्ते मे लाइफ सेविंग सिस्टम के खराब होने से हो गई। 

परिवार वालो ने निजी अस्पताल प्रबंधन पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि 21हजार से अधिक राशि वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेश हेतु परिजनों ने अस्पताल को इलाज हेतु विशाखापटनम ले जाने हेतु भुगतान  किये ,पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा एम्बुलेश के वेंटिलेटर व अन्य यंत्र को चेक किये लापरवाही पूर्वक मृतक गायत्री सेठिया को रिफर कर दिया गया ,अस्पतला से कुछ दूर जाते ही एम्बुलेश का वेंटिलेटर ने काम करना बंद कर दिया व जिस से मरीज की तबियत बिगड़ गई। 

मुक्तिमोर्चा के सयोंजक ने पूरे मामले में राज्य सरकार की बस्तर की मेडिकल व्यवस्था हेतु बनाये गए ढीले नीतियों के  लापरवाही का खामियाजा बस्तर के लोगो को उठाना पड़ता है। 

प्रशासन की लापरवाही व असजगता के कारण शासकीय व निजी अस्पताल प्रबंधन हमेशा लापरवाही करते आये है। जो घटना अभी घटी है। वह एक बड़ी लापरवाही है। पर अब तक जिला प्रशासन व सरकार के द्वारा इस गम्भीर विषय पर किसी भी प्रकार की संवेदनशीलता नही दिखाया गया है। न ही इस लापरवाही के लिए कोई जांच प्रारम्भ की गई है। बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा सरकार व जिला प्रशासन से मांग करता है। की पूरे मामले की जांच कमेटी गठन कर अनुविभागीय अधिकारी स्तर पर करवाई जाए ,मृतक परिवार को 50 लाख का मुआवजा  ,व परिवार से एक सदस्य को नोकरी व अस्पताल प्रबंधन पर जांच उपरान्त कार्यवाही की जाए वह बस्तर की मेडिकल व्यवस्था को लेकर बस्तर हित मे एक समीक्षा बैठक आहूत कर बस्तर के सभी वर्ग से राय शुमारी की जाए। यदि इन मांगों को सरकार व प्रशासन कोई पहल नहीं करती है। तो आगामी दिनों में बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा।