कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः जान और जहान

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः जान और जहान

जान है तो जहान....

एक कहावत को चरितार्थ करने में

इस तरह लगे हुए हैं सबके सब

कि जहान की चिन्ता ही नहीं रही किसी को

भाड़ में जाये जहान,बस बची रहे जान


सब बच जाना चाहते हैं एक-दूसरे को मारकर 

भाग जाना चाहते हैं लूटकर न जाने कहाँ

बसाना चाहते हैं कोई और दुनिया

हारना तो स्वीकार ही नहीं करते किसी से

जो रीत है जहान को बचाने की

सब जीत जाना चाहते हैं सबसे


कौन समझाये इन हारे हुए जुआरियों को

कि जहान को बचाये बिना

क्या कर लेगी आपकी अकेली बची हुई जान