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गोधन न्याय योजना से जिवरी की महिला समूह को मिली स्वावलंबन की राह

गोधन न्याय योजना से जिवरी की महिला समूह को मिली स्वावलंबन की राह

रायगढ़। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना जिसका उद्धेश्य पशुपालकों को लाभ पहुंचाने और वर्मी खाद के माध्यम से जैविक कृषि के लिए किसानों को प्रेरित करने के साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका संवर्धन को बढ़ावा देना था। यह उद्धेश्य जिवरी गोठान के महिला समूह के माध्यम से पूरा होता दिखाई दे रहा है। इसके माध्यम से पशुपालक गोबर बेच के धनार्जन कर रहे है, वहीं महिला समूह को वर्मी खाद निर्माण से रोजगार का अवसर भी मिला है। वर्मी खाद के माध्यम से आज लोगों के थाली में जैविक तरीके से उगाया भोजन पहुंच रहा है।

जिले के तमनार ब्लाक के सराईपाली के अन्तर्गत आने वाले जिवरी गोठान महिला समूहों ने अपने प्रयासों से सफलता की मिसाल पेश की है। कृषि विस्तार अधिकारी बताती है कि यह गोठान तैयार होने के पश्चात प्रथम चरण में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के लिए प्रशिक्षित किया गया। इस कार्य के लिए महिलाओं को लगातार उत्साहवर्धन भी किया गया। गोठान जंगल में होने के कारण सूखे कचरे की अधिकता थी, जिससे पश्चात अतिरिक्त सूखे कचरे की व्यवस्था किया गया। टांका भराई पश्चात प्रति टांका 4 किलो केचुआ डाला गया। जिसमें 150-200 केचुआ थे, अगली चुनौती केचुआ का उत्पादन था। जिसके लिए कई प्रयोग किया गया। आज जिवरी गोठान में प्रति टंकी 2-3 लाख केचुआ उपलब्ध है। गौठान में अब तक कुल 402 क्विंटल खाद विक्रय किया जा चुका है। जिसमें से 01 लाख 47 हजार रूपए का मुनाफा महिला समूह को हुआ। इसके अतिरिक्त महिलाओं द्वारा 70 हजार रुपये का केचुआ भी अभी तक विक्रय किया जा चुका है।

महिलाओं ने आय मूलक कार्य भी किया शुरू

महिलाओं द्वारा वर्मी कम्पोस्ट विक्रय से लाभ अर्जित करने के साथ ही अतिरिक्तआय एवं रोजगार के लिए अन्य गतिविधियां भी तैयार की जा रही है। जिसमें मुख्य रूप से मशरूम उत्पादन, कटिंग, बडिंग एवं ग्राफटिंग से उन्नत पौधे तैयार करना शामिल है। इसके अलावा टमाटर प्रोसेसिंग, रेशम के धागे तथा टोकरी बनाना शामिल है।

किसानों को जैविक खाद के उपयोग के लिए भी कर रही प्रोत्साहित

गोठान में मुख्य रूप से वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जाता है। जिसे महिला समूह द्वारा किया जा रहा है, इससे महिलाएं स्वावलंबी बन रही है। आज महिलाएं गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन के साथ ही ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में सहभागिता निभा रही है। समूह की महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के अलावा अपने घरों में भी जैविक सब्जियां उगा रही है। इसके साथ ही अन्य किसानों को वर्मी कम्पोस्ट के फायदे बताकर किसानों को जैविक खाद के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है।