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फ र्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर 31 मार्च तक कुपोषण के कलंक से मिलेगी प्रदेश को मुक्ति?

 फ र्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर 31 मार्च तक कुपोषण के कलंक से मिलेगी प्रदेश को मुक्ति?

भोपाल।  चाहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पिछले 15 वर्षों का शासनकाल हो या फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से विदाई के बाद बनी चौथी बार भाजपा सरकार हो सभी सरकारों के कार्यकाल के दौरान शिवराज सिंह के लच्छेदार और लोक लुभावाने वादों के चलते प्रदेश में अमन चैन दिखता रहा। लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कुछ और है।

अभी तक प्रदेश के माथे से कुपोषण के कलंक का टीका मिटाने के लिऐ करोड़ों रुपये खर्च किये गये लेकिन जिले में व्याप्त भ्रष्ट अधिकारियों की कभी जिले के उच्च अधिकारियों तो कभी अपने विभाग के एकाउंटेंट व अन्य अधिकारियों की सांठगांठ से कुपोषण की प्रगति के मामले में कागजी प्रगति की रंगोली सजाकर शिवराज और सरकार को खुश करने के भरसक प्रयास किये गये यदि सिंधिया की मेहरबानी से बने शासन की ही करें तो लॉकडाउन के दौरान जहां आंगनबाडिय़ों में बच्चे घर से बाहर निकल कर आये तक नहीं लेकिन कागजों में पोषण आहार का वितरण की कागजी रंगोली सजाकर लॉकडाउन के दौरान कुपोषण आहार वितरण किये जाने का दावा प्रदेश के महिला बाल विकास अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जब घरों से निकलर बच्चे आंगनबाडिय़ों तक पहुंचे ही नहीं तो उनके जगह पोषण आहार किसको वितरित कियागया प्रदेश के कुपोषण के मामले में बद से बदतर स्थिति कोई दूरदराज के जिलों में बल्कि राजधानी भोपाल में ही यदि ठीक से जांच कराई जाये तो सैंकड़ों कुपोषित बच्चे निकल आयेंगे। यदि यह स्थिति राजधानी की है तो दूरदराज के इलाकों की क्या होगी इसका तो अंदाजा ही लगाया जा सकता है लेकिन इसके बावजूद भी राज्य शासन प्रदेश के सभी जिलों को 31 मार्च तक कुपोषण से मुक्त कराने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया। सवाल यह उठता है कि जो महिला बाल विकास के अधिकारी अभी तक इस कुपोषण के कलंक से छुटकारा दिलाने के नाम पर प्रगति की कागजी रंगोली वर्षों से सजाते आ रहे हैं वह क्या 31 मार्च तक ऐसा क्या कर दिखायेंगे कि शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के चलते प्रदेश के माथे से कुपोषण के कलंक का टीका मिटाने में सफल हो जायेंगे? यदि शिवराज सरकार के शासन में बैठे महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारी शिवराज सरकार के चौथे शासनकाल के इन नौ महीने जिनमें अधिकांश समय लॉकडाउन में गुजरा उन दिनों की कुपोषण आहार के संबंध में निष्पक्ष एजेंसी से जांच करा ली जाए तो यह साफ हो जायेगा कि किस तरह से महिला बाल विकास के अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों और अपने विभाग के अधिकारियों और एकाउंटेंट से मिलीभगत कर पोषण आहार वितरण के नाम पर कैसा खेल खेला, लेकिन ऐसा शासन द्वारा किये जाने की जरा भी उम्मीद नहीं है?

क्योंकि यह सभी जानते हैं कि पूर्व कमलनाथ सरकार के 15 महीनों के शासनकाल के दौरान जो सरकारी योजनाओं में गोलमाल हुआ उसमें 12 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में पोषण आहार के नाम पर घोटाला करने के मामले सामने आए? जिस लेनदेन को लेकर भाजपा के नेता पूर्व कमलनाथ सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश में है? सवाल यह उठता है कि 15 महीने में 12 करोड़ का खेल हुआ है? तो शिवराज सरकार में कितना खेल हुआ होगा? यह जांच और शोध का विषय है हालांकि शिवराज सरकार के चौथे शासनकाल के दौरान जिनमें अधिकांश समय लॉकडाउन का समय रहा उस लॉकडाउन अवधि के दौरान भी प्रदेश के तमाम जिलों में पोषण आहार वितरण को लेकर प्रगति की रंगोली सजाकर जो खेल जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने किया है उसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं तो कुछ कांग्रेसी यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि जिस प्रकार से शिवराज सरकार के 15 सालों के कार्यकाल के दौरान कांग्रेसी नेता बाला बच्चन ने ठेठ आदिवासी बाहुल्य जिला झाबुआ से योजनाओं के नाम से 90 करोड़ रुपये निकालकर राजधानी में लगाने का आरोप लगाया था कहीं लॉकडाउन अवधि के दौरान कुपोषण के नाम पर महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से कागजी रंगोली सजवाकर कुपोषण आहार की राशि प्रदेश के अधिकांश जिलों से वापस तो नहीं बुला लिया था? इस सवाल का जवाब लोग खोजने में लगे हैं तो वहीं भ्रष्ट महिला एवं बाल विकास अधिकारी कुपोषण आहार वितरण के नाम पर खेल करने में लगे हुए हैं? ऐसी स्थिति में जब सरकार द्वारा 31 मार्च तक यानि चंद महीनों में प्रदेश के माथे से कलंक का टीका मिटाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया है उस लक्ष्य की पूर्ति को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं?