कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः डाक्टर गांधी की याद

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः डाक्टर गांधी की याद


ठिठकी खड़ी हैं प्लेटफार्म पर

सब रेलगाड़ियाँ

बचने के लिए महामारी से

कहीं नहीं ले जा रहीं किसी को

सुनसान प्लेटफार्म पर

पड़ा रह गया है गांधी का सामान


कचहरी पर कब्ज़ा जमाकर

न्याय से दूर रखने वाले

वकीलों की बन्द पड़ी हैं दूकानें

मौत से भयभीत

सूनी पड़ी हैं सब अदालतें

गूँगे हो गये बड़बोले नेता

खड़े नहीं हो पा रहे किसी के साथ


बन्द हो गये सब स्कूल

चल नहीं पाये

क़ुदरत के अनुकूल


काम नहीं आ रहे अस्पताल

नहीं मिल रहा 

अमीरी से फैली महामारी का इलाज

कोई प्रयोगशाला नहीं खोज पा रही

रोग की जड़


किसी को तो आ रही होगी अकेले में

डाक्टर गांधी की याद

उजड़े हुए गाँवों में,डरे हुए शहरों में


अपना बोझ उठाने में असमर्थ

आदमी के जिस्म में

घर कर गया है दूर देश से आया 

कोई छूत का रोग

लोग बन्द हैं अपने-अपने घरों में

बेघरों से दूर रहकर 

बचा रहे हैं अपनी जान


खो रहे हैं एक-दूसरे का विश्वास

ख़ुदा और भगवान