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नदारद सत्‍ता के नेताओं को बचाने की नाकाम कोशिश कर रहीं हैं महापौर - किशुन यदु

नदारद सत्‍ता के नेताओं को बचाने की नाकाम कोशिश कर रहीं हैं महापौर  -  किशुन यदु

राजनांदगांव, 14 मई। नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु ने महापौर हेमा देशमुख के बयान पर करारा प्रहार किया है। उन्‍होंने कहा कि महापौर श्रीमती देशमुख अपने आलाकमान और प्रभारी मंत्री को बचाने की कोशिशों में बेतुके बयान दे रहीं हैं। प्रदेशभर में बिगड़ती स्थिति को लेकर सरकार आरोपों से घिरी हुई है। उन्‍होंने कहा कि आम जनमानस की मदद को लेकर पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह और भाजपा-भाजयुमो के कार्यकर्ता मोर्चा संभाले हुए हैं। जवाब तो इस बात का चाहिए कि इस विपरित स्थिति में प्रभारी मंत्री मोहम्‍मद अकबर क्‍या कर रहे हैं और कहां हैं ? जिला अस्‍पताल में व्‍यवस्‍थाएं तंग हैं। वेंटिलेटर का मास्‍क तक अस्‍पताल में उपलब्‍ध नहीं है.. इसे लेकर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री टीएस सिंहदेव क्‍या कर रहे हैं ? जिम्‍मेदार कांग्रेसी भी इन अव्‍यवस्‍थाओं को लेकर सवाल उठाने से आखिर परहेज क्‍यूं करते हैं। 

नेता प्रतिपक्ष यदु ने कहा कि संस्‍कारधानी में मरीज एक-एक सांस के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह और भाजपा-भाजयुमो के कार्यकर्ता अपने ही स्‍तर पर खुद जुटाई गई सुविधाओं के साथ लोगों की मदद कर रहे हैं। और यह मदद न सिर्फ संस्‍कारधानी के लोगों को मिल रही है अलबत्‍ता प्रदेश के कई हिस्‍सों तक पूर्व मुख्‍यमंत्री अपने स्‍तर पर मदद मुहैया करा रहे हैं। कांग्रेसियों और खासकर महापौर श्रीमती देशमुख को ये जानकारी होनी ही चाहिए कि राजनांदगांव का नेतृत्‍व करने वाले पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह पूरे प्रदेश के नेता हैं। 

उन्‍होंने यह भी कहा कि भाजपा के कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों की बात महापौर न ही करें तो बेहतर है क्‍यूंकि इसका जवाब कांग्रेस के पास भी नहीं है। ढाई साल बीत चुके लेकिन सरकार की ओर से संस्‍कारधानी को अब तक कुछ हासिल न हो सका। कांग्रेसी महज भाजपा कार्यकाल के निर्माण कार्यों का फीता काटकर खुद को संतुष्‍ट करते रहे हैं। महापौर स्‍वयं भी राजनांदगांव शहर को किसी तरह की विशेष उपलब्धि दिलाने में असफल रहीं हैं। एक तरह से देखा जाए तो राजनांदगांव के कांग्रेसी अपनी ही सत्‍ता में दरकिनार किए जा चुके हैं।

गर्मी का वक्‍त है और शहर के कई हिस्‍सों में पानी को लेकर हाहाकार की स्थिति है। इसके उलट डेढ़ वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुकीं महापौर इस मामले में उदासीन ही हैं। अमृत मिशन योजना के ट्रायल को लेकर ढींढोरा पीटने के बाद इस योजना का हाल बेहाल है। सवाल यह भी है कि अगर योजना में ठेकेदार या अधिकारियों की ओर से लापरवाही की जा रही है तो महापौर इस मामले में कार्रवाई करने से क्‍यूं पीछे हट रहीं हैं ? अपनी ही सत्‍ता न संभाल पा रहीं महापौर न जाने किस नजरिए से 15 साल प्रदेश की सत्‍ता संभालने वाले पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह को लेकर सवाल उठा रहीं हैं। यह उनका स्‍तर ही नहीं है।