कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः भौंका चैनल भौंक रहे...

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः भौंका चैनल भौंक रहे...


सूनी सड़कें घर में बच्चे चौंक रहे

मौन नागरिक, भौंका चैनल भौंक रहे

वे सरकारी ढोल बजाते रहते हैं

वे दरकारी बोल छिपाते रहते हैं

जनता लड़ती नहीं किसी से

हर चैनल पर भौंका पेनल लड़ते हैं


इस चैनल पर चार भौंक देते कोई

उस चैनल पर चार भौंक देते कोई

कुछ पूँछ उठा कर भौंक रहे

कुछ पूँछ दबा कर भौंक रहे

सब बाँध इलाका भौंक रहे

बदअमनी की आग लगाकर

देश भाड़ में झौंक रहे


इस दल-बल के भौंका चैनल भौंक रहे

उस छल-बल के भौंका चैनल भौंक रहे


जनता की तबियत ढिल्ली-सी

नेतागिरी शेख चिल्ली-सी

लोकतंत्र का खम्बा नोंचे

एंकर खिसियानी बिल्ली-सी