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सरकार का बड़ा फैसला, अब जम्मू-कश्मीर में 15 साल बिता चुका हर शख्स वहां का मूल निवासी

सरकार का बड़ा फैसला, अब जम्मू-कश्मीर में 15 साल बिता चुका हर शख्स वहां का मूल निवासी

नई दिल्ली, 2 अप्रैल। एक बड़े फैसले में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में मूल निवास से जुड़े नियम बदल दिए हैं. नए नियमों के मुताबिक इस केंद्र शासित प्रदेश में 15 साल या इससे ज्यादा अवधि बिता चुके लोगों को यहां का मूल निवासी माना जाएगा. यानी उन्हें अब सरकारी नौकरियों के साथ तमाम दूसरे अधिकार भी मिल सकेंगे. सरकारी अधिसूचना के मुताबिक ये नियम इसी मंगलवार से अमल में आ गए हैं. इनमें यह भी प्रावधान है कि जिसने जम्मू-कश्मीर में रहकर सात साल या इससे ज्यादा वक्त तक पढ़ाई की हो और यहां से 10वीं या 12वीं की परीक्षा दी हो, वह भी मूल निवास प्रमाणपत्र का अधिकारी है. ये सभी लोग अपने-अपने इलाकों के तहसीलदार से यह प्रमाण पत्र हासिल कर सकते हैं.

केंद्र सरकार के इस फैसले का राज्य की प्रमुख पार्टियों पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विरोध किया है. उनका कहना है कि धारा 370 को निष्प्रभावी करने के बाद सरकार का यह नया फैसला घावों पर नमक रगड़ने जैसा है. केंद्र सरकार ने बीते साल इस धारा को निष्प्रभावी कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था. इसके साथ ही इसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था.