कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविता - मौत का कारोबार

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविता - मौत का कारोबार


वे आपस में बाँटते आये हैं सुख-दुख

मरते आये हैं अपनी मौत


वे अपनी गृहस्थी कंधों पर उठाये

भाग रहे हैं अपने गाँव की ओर

उन्हें नहीं मिल रही कोई नाव

कहीं नहीं जा रही रेलगाड़ी

बार-बार चूक रही है उनकी बस

पीछा कर रही है दूर देश से आयी मौत शहर में


वे गाँव छोड़कर आये जिस शहर में

रोजी-रोटी कमाने

उसी शहर में अब नहीं मिल रही उन्हें कोई जगह

बंद हैं घर-व्दार

 

वे गाँव लौट रहे हैं 

शहरों में भरा है मौत का बाजार

चल रहा है जीवन की लूट का कारोबार


वे घर-आँगन से दूर

अकेले अपना जीवन कैसे काटेंगे

वे गाँव में अपना दुख कैसे बाँटेंगे

पेटिंग साभार- शगुन नंद