सेवा, दान के नाम पर लगी छपास रोग की बीमारी

सेवा, दान के नाम पर लगी छपास रोग की बीमारी

संजय जैन

धमतरी, 5 अप्रैल। कोविड-19 को लेकर समूचा देश चिंतित नजर आ रहा है। सरकारी स्तर पर इसकी रोकथाम हेतु व्यापक प्रचार प्रसार कर बारंबार यही हिदायत दी जा रही है कि इससे बचाव हेतु दूरियां बनाकर अपने घरों में निवास करते रहें और यह भी सच है कि इस महामारी से देश, प्रदेश के गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों को जीविकोपार्जन हेतु काफी कठिनाईयों के दौर से गुजरना पड़ रहा है। इसे लेकर शासन के द्वारा लगातार खाद्य सामग्री सहित अन्य वस्तुओं की आसानी से उपलब्धता कराने जिला प्रशासन भी मुस्तैद नजर आ रहा है। इसी कड़ी में समाजसेवी संस्थाओं, दानदाताओं द्वारा भी अपने अपने स्तर पर खाद्य सामग्री, दान इत्यादि विभिन्न माध्यमों से भेजे जा रहे हैं किंतु कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस मामले में मदद कम कर रहे हैं और फोटो छपवाने में महारथ हासिल किये हुए हैं।

देश में कोरोना वायरस से बचाव हेतु शासन द्वारा पूरे देश में तालाबंदी की गई है और इसके पालन हेतु प्रशासनिक स्तर पर समूचे देश में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सुरक्षित करना है। स्वास्थ्य अमले की रिपोर्ट के मुताबिक छींक, खासी, बुखार आने पर विभिन्न टेलीफोन नंबर के साथ साथ समीपस्थ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित होकर जांच कराये जाने की अपील की जा रही है। इस वायरस का ईलाज वर्तमान समय में नहीं ढूंढा जा सका है। लेकिन इसके लिये लगातार प्रयास जारी है। लेकिन तब तक के लिये तालाबंदी, एक मीटर की दूरियां बनाने का व्यापक प्रचार प्रसार किया गया है जिसका पालन करने से ही शासन और प्रशासन का मुख्य मकसद आम लोगों की सुरक्षा है, जिसका सभी को पालन किया जाना बहुत ही जरूरी है क्योंकि इस वायरस का संक्रमित व्यक्ति यदि किसी के संपर्क में आता है तो उसके संक्रमित किटाणु उसमें भी प्रवेश कर सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अमले के मुताबिक अभी तीसरे स्टेज पर देश का ईलाका चल रहा है और यह स्थिति से यदि देश सुरक्षित रह गया तो कोरोना वायरस को हराने के लिये चल रही कवायद सफल साबित होगी परंतु देखा जा रहा है कि लॉकडाऊन के चलते इसका पालन बहुतायत क्षेत्र में नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर पूर्व में 7 से 3 बजे तक के समय को संशोधित करते हुए 7 से 12 बजे तक किया गया है। 

जिले में लॉकडाऊन का अक्षरश: पालन किये जाने हेतु जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। जिलेवासियों को लॉकडाऊन का पालन करने निर्देशित किया गया है। जो समझदार लोग हैं इसका पालन कर शासन प्रशासन को सहयोग कर रहे हैं। इसी लॉकडाऊन के चलते गरीब एवं मध्यम परिवार के लोगों को खाद्य सामग्रियों के लाले पड़े हुए थे जिसे देखते हुए शासन द्वारा विभिन्न खाद्य सामग्रियां मुहैया कराई जा रही है। देश के प्रधानमंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री की अपील पर अनेक ऐसे समाजसेवी संस्थाओं ने ऐसे गरीब और बेसहारा तथा उपेक्षित लोगों के लिये अपने अपने स्तर पीएम, सीएम के सहायता कोष में चेक के माध्यम से राशियां प्रेषित करवाई गई है। स्वेच्छा से लोग सीधे उपरोक्त कार्यालयों में भी अपने अपने राशि चेक के माध्यम से भेज रहे हैं। जिले में जो सामग्रियां समाजसेवी संस्थाओं द्वारा एकत्रित की गई है उसे गरीब एवं मध्यम श्रेणी के परिवारों को वितरित किया जा रहा है। लेकिन इस दान-पुण्य के काम में कुछ लोग दान कम, नाम ज्यादा कमाने के फेर में भी कार्य कर रहे हैं और उसका फोटो के साथ इतना प्रचार कर रहे हैं जिसे लेकर कुछ गरीबों ने यहां तक कहा है कि ऐसे माहौल में छपास रोग जो पिछले कई दिनों से देखा जा रहा है, वैसा नहीं होना चाहिये। आपदा से घिरे प्रत्येक देशवासी को इस महामारी से निपटने के लिये अपना सहयोग नि:स्वार्थ भाव से करना चाहिये। शहर के एक नेवरिये तथाकथित नेता जो अपने आप को राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेताओं के समकक्ष बताते आ रहे हैं, उनके द्वारा भी मात्र 11 हजार रूपये पीएम कोष में भिजवाकर सस्ती लोकप्रियता पूर्व की तरह हासिल की जा रही है। 

बताया जाता है कि ऐसे दान देने वाले तथाकथित नेता के द्वारा जब 11 हजार रूपये पीएम कोष में भेजे जाने की बात जब लोगों को बताई गई और इसका मीडिया में व्यापक प्रचार प्रसार हुआ तो लोग इस बात को लेकर उनकी खिल्ली उड़ाने लगे और कहने लगे कि जो व्यक्ति अपने आप को शीर्ष स्तर के नेताओं के साथ पूर्व वर्षों से फोटो वायरल कर अपने को प्रचारित करते आ रहा है। लोगों को ऐसी उम्मीद थी कि उक्त बड़बोले नेता द्वारा ऐसी महामारी के लिये कम से कम 5 लाख रूपये भेजना था ताकि उक्त कोष के माध्यम से आम गरीबों को उक्त राशि से शासन मदद करवाये परंतु इसके द्वारा मात्र 11 हजार रूपये दिये गये। लेकिन इसका प्रचार लाखों रूपये दान किये गये, ऐसा प्रचार देखने को मिल रहा है। इसी तरह अनेक लोगों द्वारा इस महामारी में सहयोग नि:स्वार्थ भाव से किया जा रहा है किंतु उपरोक्त नेता के तर्ज पर मानो इसकी श्ऱृंखला बनना शुरू हो गई है और लोगों ने 11 हजार रूपये की राशि का चेक की तरह दूसरों ने भी इसका अनुशरण करना शुरू कर दिया है जिसकी शहर में सर्वत्र चर्चा है। हालांकि यह सत्य है कि जो भी व्यक्ति इस महामारी के सहयोग में भाग ले रहा है या लेगा वह अपने स्तर पर जितनी भी राशि का चेक या सामग्री देगा, वह काबिले तारीफ है परंतु ऐसे लोगों द्वारा जिस तरह उक्त नेता अपने को प्रचारित कर रहा है, उन्होंने इसकी पुनरावृत्ति नहीं की।