कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः मन क्यों अशान्त

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः मन क्यों अशान्त


गगन शान्त

भोर तरैया शान्त

उगती बिरिया शान्त

चुगती चिरिया शान्त

काल शान्त

शान्त ताल में

मेघों के प्रतिबिम्ब शान्त

धूप शान्त

मंथर-मंथर वायु शान्त

वृक्षों की छाया शान्त

वृन्त पर पुष्प शान्त 

पुष्प पर तितली कितनी शान्त

दूर्वांकुर पर जल-बिन्दु शान्त

लिपा हुआ यह आँगन

कितना शान्त




साँवरी साँझ शान्त

अकेला दीप शान्त

नयनों से बहता दुख

कितना शान्त

नभ में शब्द शान्त

शब्द में अर्थ शान्त


तन क्यों अशान्त

मन क्यों अशान्त

जन क्यों अशान्त