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रायगढ़ कलेक्ट्रेट भी महका लैलूंगा के जवाफूल की खुशबू से

रायगढ़ कलेक्ट्रेट भी महका लैलूंगा के जवाफूल की खुशबू से


जिला कार्यालय में लगाई गई जवाफूल चावल की प्रदर्शनी, स्टाल लगा कर की गई बिक्री

रायगढ़, 12 जनवरी। जिले के लैलूंगा विकासखण्ड में उगाए जाने वाले खुशबूदार जवाफूल चावल की महक प्रदेश ही नहीं बल्कि देश मे भी मशहूर है। जैविक विधि से उत्पादित यह चावल केमिकल फ्री रहता है लिहाजा सेहत के लिए भी फायदेमंद है। जिला प्रशासन द्वारा इस चावल की खेती को बढ़ावा देने समिति का गठन किया  गया है। साथ ही विभिन्न जगहों पर प्रशासन के माध्यम से समिति द्वारा प्रदर्शनी व विक्रय काउंटर लगाए जाते है। इसी क्रम में आज जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट में स्टॉल लगाया गया, जहा अधिकारी, कर्मचारियों के अलावा शहरवासी भी चावल खरीदने पहुंचे।


 लैलूंगा क्षेत्र में उगाए जाने वाले खुशबुदार जवाफूल चावल की महक पूरे देश में मशहूर है। जैविक विधि से उत्पादित आर्गेनिक और एरोमेटिक जवाफूल चावल स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। जिला प्रशासन द्वारा कृषि विभाग के माध्यम से इस चावल की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने विभिन्न समितियां बनाई गई है तथा खेती के लिए ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है। दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन सहित देश के अन्य शहरों में भी प्रदर्शनी लगा कर बिक्री की गई है जिसमे जवाफूल की काफी डिमांड रही है। वहीं आज कलेक्टर कार्यालय के परिसर में प्रदर्शनी लगाई गई। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में एक हज़ार किसानों को जोड़कर 5 समित्तियो का गठन किया गया है, जो जवाफूल चावल का उत्पादन कर रहे है। प्रशासन द्वारा प्रत्येक समिति को खेती के लिए 15 लाख की राशि दी जाती है जिसमें से 14 लाख ऋण के रूप में होता है और 1 लाख का अनुदान दिया जाता है। इस वर्ष 215 हेक्टेयर में जवाफूल की खेती की गई है लेकिन डिमांड को देखते हुए अगले वर्ष तक बढ़ा कर 15 सौ से 2 हज़ार हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा गया है।