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गहरी अभिरूचि के साहित्यकार थे त्रिभुवन पांडे- हर्षद मेहता

गहरी अभिरूचि के साहित्यकार थे त्रिभुवन पांडे- हर्षद मेहता

धमतरी, 7 मार्च। धमतरी के पूर्व विधायक हर्षद मेहता ने त्रिभुवन पांडे को याद करते हुए कहा कि जब भी मैं साहित्यिक गोष्ठियों या शहर के कार्यक्रमों में अक्सर गुरूदेव श्री त्रिभुवन पांडे जी से मुलाकात हो जाती थी तब पांडे जी आओ हर्षद यह कहकर सम्मान देते थे। मैं भी उत्साह से भर जाता था। पांडे जी जब भी किसी दृश्य या घटना को देखते थे तब ऐसा प्रतीत होता था कि भीतर का रचनाकार गहरी अभिरूचि के साथ देख रहा है। हर मौके पर हम अपनी बात उनसे साझा करते थे। तब उनके चेहरे में मुस्कान उभर कर आ जाते थे। किसी सत्य को पाकर उसे व्यक्त करने की व्यग्रता छलकती सी नजर आती थी। जिन बातों की ओर लोग ध्यान नहीं देते थे उन बातों के पीछे छिपे अर्थ को पांडे जी ढूंढ निकालते थे। घटनाओं, स्थितियों, वस्तुओं और व्यक्तिओं के विरोधाभाषों को पकड़ने की अद्भुत दृष्टि त्रिभुवन पांडे जी में थे। उनका जाना छत्तीसगढ़ प्रदेश एवं साहित्यिक बिरादरियों के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके स्मृति सदैव याद आते रहेंगे।