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छत्तीसगढ़ राज्य में 'वृक्ष प्राधिकरण' की स्थापना की जाए -शिवसेना

छत्तीसगढ़ राज्य में 'वृक्ष प्राधिकरण' की स्थापना की जाए -शिवसेना


 शिवसेना ने किया वृक्षों को सहेजने व संरक्षण हेतु मुख्यमंत्री से सुझावपूर्ण निवेदन

जगदलपुर, 27 जून। शिवसेना के ज़िला अध्यक्ष व समाज़ सेवक अरुण पाण्डेय् ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम खुला पत्र लिखकर उनसे सुझावपूर्ण निवेदन किया हैकि प्रदेश में "वृक्ष प्राधिकरण" की स्थापना किया जावे।

उन्होंने कहा हैकि राज्य के शहरी इलाक़ों में लगातार भौतिक विकास व जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार वृक्षों की संख्या कम होते ही जा रही है, जोकि भविष्य में शुद्ध प्राण वायु हेतु विकराल समस्या का रूप धारण कर सकती है। राज्य शासन / ज़िला प्रशासन द्वारा 50 वर्ष पुराने वृक्षों को विरासत का दर्ज़ा देने 'हैरिटेज ट्री' ऐसी विशेष संकल्पना पर विचार करते हुए नगरीय क्षेत्रों में 50 वर्ष की आयु के वृक्षों के संरक्षण व संवर्धन हेतु विशेष प्रयास किया जाना चाहिए।


शिवसेना के ज़िला अध्यक्ष अरुण पाण्डेय् ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया हैकि वृक्षों के संरक्षण, लगातार हो रहे बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई, पुराने वृक्षों के संवर्धन और वृक्षारोपण हेतु छत्तीसगढ़ राज्य शहरी क्षेत्र वृक्ष संरक्षण व संवर्धन क़ानून लागू किया जावे। छत्तीसगढ़ राज्य वृक्ष प्राधिकरण की स्थापना, स्थानीय वृक्ष प्राधिकरण के गठन, कर्तव्यों का निर्धारण, वृक्षारोपण हेतु सामूहिक भूमि का आबंटन, वृक्षों का प्रतिरोपण, वृक्ष संरक्षण हेतु वैकल्पिक विषयों की खोज़, वृक्ष उपकर व दंड के प्रावधान को शामिल किया जावे।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में नदियों से लगातार अवैध रेत उत्खनन जारी है, ऐसे में नदी के किनारों का कटाव जारी है जिसपर नदी के तटीय क्षेत्रों में मृदा अपरदन रोकने व तटों की रक्षा हेतु वृक्षारोपण के लिए विशेष योजना बनाया जावे। गौरतलब होकि अधिकतर वृक्षों को हिंदू धार्मिक भावना के कारण लगभग 400 वर्षों से भी अधिक समय तक सुरक्षित व संरक्षित रखा जा सका है और इसके प्रमाण भी हैं। अतः राज्य के नगरीय क्षेत्रों के ऐसे वृक्षों को जिनसे जनमानस की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई हैं, उन्हें धार्मिक क्षेत्र के अनुरूप ही विकसित करते हुए ऐसे वृक्षों के संरक्षण हेतु विशेष प्रयास किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वृक्षों का संरक्षण करना भविष्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता होगी, अतः 'वृक्ष प्राधिकरण' की स्थापना करते हुए इसके अंतर्गत पुराने वृक्षों के संरक्षण व प्रतिवर्ष नए वृक्ष रोपण करके उन्हें सुरक्षित रखने के प्रयास के साथ ही वृक्षारोपण के नाम पर हो रहे धांधली व लापरवाही पर विशेष दंड का प्रावधान एवं वृक्ष लगाकर उसे न्यूनतम 10 वर्ष तक जीवित रखने वाले व्यक्ति को पर्यावरण सम्बंधित किसी तरह के पारितोषक सम्मान मिले। ऐसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को जानकारों की सलाह से सम्मिलित किया जाना चाहिए। वृक्षों का संरक्षण एवं वृक्षारोपण भविष्य के समस्त चराचर प्राणियों के लिए आवश्यक है, अतः इस कार्य में लोक सेवकों द्वारा किसी प्रकार से भ्रष्ट आचरण ना किया जा सके इस बाबत् विशेष क़ानून बनाने पर विचार करें।

शिवसेना के ज़िला अध्यक्ष व समाज़ सेवक अरुण पाण्डेय् ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया हैकि वृक्षों के काटे जाने उन्हें किसी तरह गैर क़ानूनी रूप से नुकसान पहुंचाने की स्तिथी में आम नागरिक दीवानी और सत्र न्यायालय में इसकी शिक़ायत कर सके व दोनों पक्ष की बात बिना किसी व्यक्तिगत ख़र्च के सुनी जावे अतः इसके लिए  वृक्ष प्राधिकरण के माध्यम से सरकारी वक़ीलों की नियुक्ति किया जावे। स्वयं के निजी भूमि पर प्रशासन से समझौता के तहत सार्वजनिक रूप से वृक्षारोपण करने वालों को नीम, ईमली, आंवला, बरगद, पीपल जैसे चिरायु जाती के नवजात पौधों की उपलब्धता, खाद, उर्वरक व अन्य आवश्यक वस्तुओं व सुविधाओं का निःशुल्क व्यवस्था हो सकें इस पर योजना बनाया जावे।