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कर्तव्यों के पालन से चलते हैं संसार में रिश्ते: साध्वी सुभद्रा

कर्तव्यों के पालन से चलते हैं संसार में रिश्ते: साध्वी सुभद्रा

  श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी में पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व का सप्तम प्रभात

रायपुर।  जिनकुशल सूरी जैन दादाबाड़ी में गुरूवार को कल्पसूत्र की नवमी वाचना के अंतर्गत साध्वीवर्या सरलमना सुभद्राश्रीजी महाराज साहब ने श्रद्धालुओं को साधू समाचारी में वर्णित साधुओं के आचार व नियमों से अवगत कराया। वहीं आरंभ में उन्होंने पर्वाधिराज पर्यूषण पर श्रावकों के लिए दान, शील, तप, जिनदर्शन, अहिंसा पालन आदि पांच कर्तव्यों, वर्षभर 11 कर्तव्यों और प्रतिदिन छह कर्तव्यों का पालन करने के जिनशासन में बताए गए विधान के बारे में बताया। इस प्रसंग पर उन्होंने कहा कि इस संसार में सभी एक-दूसरे से कर्तव्यों की डोर से बंधे हुए हैं। कर्तव्यों का पालन करने से ही संसार के रिश्ते चलते हैं अन्यथा नहीं। माता-पिता, भाई-बहन, भाई-भाई, अन्य कुटुम्बी जन और यहां तक कि सूर्य और चंद्र भी अपने-अपने कर्तव्यों की डोर से बंधे हुए हैं। साधू समाचारी में यह भी बताया गया है कि यदि किसी से भी राग-द्वेष, बैर, कटुता के भाव हों तो उन्हें पर्यूषण कल्प को पूर्ण करने से पहले हृदय से क्षमायाचना कर दूर करें। क्षमादान देने वाला महान होता है, जो क्षमा दान नहीं कर सकता, उसे जिनशासन में रहने का अधिकार भी नहीं होता है। इस महान पर्यूषण पर्व पर दान, तप, पूजा आदि ये सभी मोक्ष को देने वाले मार्ग हैं। वाणी के द्वारा किसी को कोई ठेस पहुंची हो तो इसके लिए उन्होंने साध्वी मंडल की ओर से श्रीसंघ से मिच्छामि दुक्कड़म किया।

धर्मसभा के पूर्वार्ध में साध्वीवर्या नवकार जपेश्वरी शुभंकराश्रीजी महाराज साहब ने श्रद्धालुओं को कल्पसूत्र के स्थिरावली अधिकार के अंतर्गत जिन शासन के आचार्यों की पट्ट परम्परा और समस्त आचार्यों के द्वारा किए गए धर्म प्रभावना के सुकृत्यों का वर्णन सुनाया। आचार्य आर्यरक्षित के प्रसंग से प्रेरणा प्रदान करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को सन्मार्ग पर चलने के संस्कार दें। आर्य सुहस्ती सूरि द्वारा एक भिक्षुक को दीक्षा प्रदान करने का कथानक सुनाते हुए साध्वीवर्या ने कहा कि सूर्योदय प्रभात के साथ हमारे भाग्य पर प्रतिदिन दस्तक देने आता है। यदि हम ही सूर्योदय काल में सोए पड़े रहे तो भाग्य भला कैसे जाग सकता है। प्रात:काल नित्य प्रति मंदिर जाकर जिनदर्शन का नियम हमारे जीवन में होना ही चाहिए।

मूल कल्पसूत्र का वाचन आज

श्रीजैन श्वेताम्बर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विमलचंद मालू, उपाध्यक्ष पारस पारख व चातुर्मास समिति के प्रचार प्रसार प्रभारी तरूण कोचर ने बताया कि कल शुक्रवार, 10 सितम्बर को प्रात: 8.45 से साध्वी भगवंतों के श्रीमुख से प्राकृत भाषा में लिखित मूल कल्पसूत्र का वाचन किया जाएगा। इससे पूर्व भाग्यशाली श्रद्धालुओं को मूल कल्पसूत्र वोहराने व श्रीसंघ को सूत्रों के प्रसंगों पर आधारित चित्रों का दर्शन कराने सहित पांच ज्ञान की पूजा करने के लाभ का अवसर प्राप्त होगा। शनिवार, 11 सितम्बर को सभी तपस्वियों का पारणा दादाबाड़ी में होगा। रविवार, 12 सितम्बर को संवत्सरी पर्व, सामूहिक क्षमापणा समारोह एवं तपस्वियों का वरघोड़ा आदि कार्यक्रम विवेकानंद नगर स्थित संभवनाथ जिनालय परिसर में होंगे।

सभी तपस्वियों का हुआ बहुमान

चातुर्मास समिति के सचिव अभिषेक गोलछा व प्रचार-प्रसार प्रभारी तरूण कोचर ने बताया कि गुरूवार को प्रवचन सभा के उपरांत पर्यूषण पर्व पर अक्षय निधि, मोक्ष आदि विविध तप करने वाले सभी तपस्वियों का श्रीऋषभदेव मंदिर ट्स्र्ट एवं श्रीजैन श्वेताम्बर चातुर्मास समिति की ओर से बहुमान किया गया। साथ ही श्रीमती सुजाता-नरेन्द्र पारख परिवार की ओर से भी तपस्वियों का बहुमान हुआ।

गुरूवार को अक्षय निधि, समवशरण, विजय कसाय तप के तपस्वियों को एकासना कराने का लाभ बसंत कुमार देवराज सेठिया, केशरीचंद महेंद्र मनोज सेठिया और विजय कुमार संजय धीरज श्रीश्रीमाल परिवार ने लिया। शाम 6 बजे से सभी श्रद्धालुओं द्वारा दादाबाड़ी के उपाश्रय एवं सदर जैन मंदिर के आराधना हॉल व महावीर भवन के प्रथम, द्वितीय तल में संवत्सरिक प्रतिक्रमण किया गया। जैन मंदिर सदरबाजार में 68 दिवसीय नवकार दरबार में गुरूवार को नवकार महामंत्र सामूहिक जाप के लाभार्थी रहे कन्हैयालाल माणकचंद कोचर परिवार।  

ऋ षभ पारख ने दी परमात्म भक्ति की मधुर प्रस्तुति

श्री जैन श्वेताम्बर चातुर्मास समिति के उपाध्यक्ष पारस पारख ने बताया कि गुरूवार को दादा गुरूदेव सामूहिक इकतीसा पाठ का लाभ गुरू भक्त परिवार, किशनचंद महावीर दिलीप मालू, उत्तमचंद विनय कुमार भंसाली एवं नरेन्द्र कुमार अभिनव पारख परिवार ने लिया। इक्तीसा पाठ के उपरांत प्रसिद्ध गायक ऋषभ पारख ने परमात्म भक्ति की मधुर संगीतमयी प्रस्तुति देकर सबको भक्तिभाव से ओतप्रोत कर दिया। बुधवार की रात्रि इक्तीसा जाप के उपरांत दादाबाड़ी सत्संग पंडाल में भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों पर बच्चों द्वारा 14 जीवंत झांकियों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियां दी गईं। सभी प्रतिभागी बच्चों को रविवार, 19 सितम्बर को सदर जैन मंदिर के आराधना हॉल में पुरस्कृत किया जाएगा।