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और अब, बिकेंगे बैंक और विश्व धरोहर ?

और अब, बिकेंगे बैंक और विश्व धरोहर ?

डॉ. चन्दर सोनाने

मोदी सरकार देश के गौरव सरकारी नवरत्न कंपनियों में से कुछ को बेचने , रेल्वे स्टेशन और हवाई अड्डे बेचने के बाद देश के 4 सरकारी बैंकों और 4 विश्व धरोहरों को बेचने जा रही है । इसके बाद किसी और सरकारी संपत्तियों के निजीकरण का नंबर आएगा । याद रखें , ये क्रम रुकने वाला नहीं है !

देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी ने पाँच दशक पहले 1969 में देश के 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर देश भर में तहलका मचा दिया था । इससे देश में पहली बार एक गरीब भी बैंक जा सका था । बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद पहली बार सरकारी जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ गरीबों को मिलना शुरू हुआ था । उस समय देश के गरीबों की मदद करना शासन की प्राथमिकताओं में से एक था । और आज ...तो अब , केंद्र सरकार देश के 4 सरकारी प्रमुख बैंक बैंक ऑफ इंडिया , सेंट्रल बैंक , बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र और इंडियन ओवरसीज बैंक को बेचने जा रही है । इन चारों बैंकों में करीब 2 लाख 22 हजार कर्मचारी और अधिकारी काम कर रहे हैं । ये सभी रातों रात किसी सरकारी बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी की बजाय किसी बड़े उद्योगपति के नौकर बन जाएंगे ! ये सब नौकरी पर आए तो थे सरकारी कर्मचारी या अधिकारी बनने ,  किन्तु उनसे बिना पूछे ये सभी गैर सरकारी हो जाएंगे ! बैंकों के निजीकरण की ये तो शुरुआत है। केंद्र सरकार एसबीआई को छोड़कर ज्यादातर सरकारी बैंकों को बेचने का मन बना चुकी है । एसबीआई को भी इसलिए छोड़ा जाएगा , क्योंकि मोदी सरकार को एक बड़े बैंक को सरकारी रखना मजबूरी है ! 

अब हम बात करते हैं देश के गौरव विश्व धरोहरों के बिकने की ! केंद्र सरकार देश के 4 विश्व धरोहर का भी निजीकरण करने जा रही है । चौंक गए ? अरे भाई, ये भाजपा की केंद्र सरकार है। अब चौंकना भूल जाइए ! बिकने जा रहे ये चार विश्व धरोहर हैं - हिमाचल प्रदेश की शान कालका - शिमला, पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी - दार्जिलिंग , तमिलनाडु का नीलगिरी और महाराष्ट्र का गौरव नेरल - माथेरान विश्व धरोहर। केंद्र सरकार की सारी तैयारियाँ हो चुकी है। आप कभी भी इसकी घोषणा सुन सकते हैं। मोदी सरकार आपको इसका इंतजार नहीं करवाएगी ! 

केंद्र सरकार देश की सम्पत्तियाँ एक - एक कर बेच रही है। और हम सब ये सब चुपचाप देखने और सुनने के लिए अभिशप्त हैं !