निजी अस्पताल कोरोना महामारी को दुह रहे हैं, धर्मार्थ ट्रस्ट बन गये कमाई का जरिया, आक्सीजन सिलेण्डर की कालाबाजारी, एक-एक अस्पताल की करोड़ों की बिलिंग !

निजी अस्पताल कोरोना महामारी को दुह रहे हैं, धर्मार्थ ट्रस्ट बन गये कमाई का जरिया, आक्सीजन सिलेण्डर की कालाबाजारी, एक-एक अस्पताल की करोड़ों की बिलिंग !
जनधारा संवाददाता
रायपुर. प्रदेश में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. सैकड़ों मौतें हुई हैं जिनमें दर्जनों डॉक्टर भी शामिल हैं. लाखों लोग संक्रमित होकर अपना इलाज करा रहे हैं. हाल यह हैं कि सरकारी तो भूल जाइए, निजी अस्पतालों में तक में बेड नही हैं. ऐसे में कोरोना मरीज बिना इलाज के ही दम तोड़ रहे हैं. दूसरी ओर आक्सीजन सिलेण्डर की डिमाण्ड बढ़ता देख उसकी कालाबाजारी शुरू हो गई है. यह बाजार में 8 हजार प्रति सिलेण्डर तथा अस्पताल में 25 हजार तक में मिल रहा है. 14 निजी चिकित्सालयों ने पेड आइसोलेशन सेंटर भी खोले हैं.


एक तस्वीर यह है कि जब अस्पताल फुल हो गए तो उसके प्रबंधन ने धर्मशालाएं, चेरिटेबल ट्रस्ट के भवन, सामाजिक सामुदायिक भवन नाममात्र के किराए पर खरीदे और मरीजों को ईलाज की व्यवस्था की. आश्चर्य कि निजी अस्पताल किराया नाममात्र का दे रहे हैं और उससे कमाई भरपूर कर रहे हैं. एक धर्मशाला का किराया दिया जा रहा है एक लाख रूपये जबकि अस्पताल ने महीनेभर में करोड़ों की बिलिंग की है. प्रति कोरोना मरीज 3000 से 5000 हजार तक वसूले जा रहे हैं. राजधानी के वी.वाय. हॉस्पिटल ने माहेश्वरी भवन को किराये पर लिया है जहां प्रति कोरोना मरीज प्रतिदिन 4000 रूपये से अधिक के पैकेज पर इलाज किया जा रहा है. श्री नारायणा हॉस्पिटल ने मारूति मंगलम भवन को किराये पर ले रखा है. यहां भी सामान्य मरीज का 5000 रूपये दिन का पैकेज है. शदाणी दरबार और जैनम मानस को समाज वालों ने लिया है.  

हालांकि निजी अस्पताल इसका बाकायदा किराया भी चुका रहे हैं लेकिन अगर ये धर्मार्थ ट्रस्ट हैं तो इसमें कोविड19 मरीज को भी राहत मिलनी चाहिए लेकिन वैसा है नही. बताया जाता है कि यदि मरीज गंभीर है तो 4000 से 50 हजार रूपये प्रतिदिन तक का वसूला जा रहा है. जानते चलें कि कोरोना संक्रमितों मरीजों का इलाज राज्य के सभी जिला अस्पतालों और 38 निजी अस्पतालों में चल रहा है. राज्य में 186 सरकारी कोविड केयर सेंटर और 18 पेड आइसोलेशन सेंटर भी कोविड मरीजों की देखरेख कर रहे हैं। कोविड मरीजों की सुविधा के लिए राज्य के सभी 29 जिला अस्पतालों, डा भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय ,कोविड केयर सेंटर में उनके उपचार और देख भाल की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा राज्य के 38 निजी अस्पतालों को भी कोविड मरीजों के उपचार करने की स्वीकृति दी गई है जिसमें रायपुर के 20, बिलासपुर और दुर्ग के सात-सात, रायगढ़ के दो, राजनांदगांव और धमतरी का एक-एक निजी अस्पताल शामिल है.

भर्ती होते ही 50 हजार दीजिए
निजी अस्पतालों ने इस महामारी के नाम पर लूट मचा रखी है. एक पीड़ित ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तेलीबांधा स्थित वी.केयर अस्पताल में सामान्य बुखार होने पर भी 50 हजार रूपये जमा करवाकर मरीजों को एडमिट किया जा रहा है. शिकायत यह भी है कि अस्पताल में मरीजों को स्तरीय भोजन व नाश्ता नही दिया जा रहा है.

सिलेण्डर की कालाबाजारी शुरू, 8 हजार से 25 हजार रूपये प्रति सिलेण्डर वसूले जा रहे
निजी अस्पताल में भर्ती कराने आए मरीज ने बताया कि आक्सीजन सिलेण्डर की कालाबाजारी हो रही है. बाजार में जहां कमी हो गई हैं, वहीं 8 हजार प्रति सिलेण्डर वसूला जा रहा है जबकि अस्पताल में इसका चार्ज आपातकाल में 25 हजार प्रति सिलेण्डर तक लिया जा रहा है. दरअसल अगर कोरोना मरीज को सांस लेने की दिक्कत है तो उसे 6 लीटर आक्सीजन प्रति मिनट देना होती है. जबकि एक सिलेण्डर में मात्र 600 लीटर आक्सीजन होता है जोकि डेढ़ घणटे से अधिक नही चल पाता.

रातोंरात आक्सीजन सिलेण्डर दिया : नवीन बाफना
दंत रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नवीन बाफना ने बताया कि हमारे परिचित कोरोना मरीज को सांस लेने में समस्या हुई तो मैंने अपना क्लीनिक खोलकर रातोंरात आक्सीजन सिलेण्डर दिया और उसकी जान बचाई. सुबह तक मरीज ठीक होकर अस्पताल में भर्ती हो चुका था. डॉ. बाफना का सुझाव है कि जो कोरोना मरीज पाजिटिव से निगेटिव होकर पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं, सरकार को चाहिए कि कार्यकर्ता के रूप में उनकी सेवा ली जानी चाहिए क्योंकि कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए कार्यकर्ताओं की बेहद कमी है.