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हार्ड वर्क और निरंतर कोशिश सफलता का सबसे बड़ा रास्ता..डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे

हार्ड वर्क और निरंतर कोशिश सफलता का सबसे बड़ा रास्ता..डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे


रमेश गुप्ता 

भिलाई ..यदि आप संदीप माहेश्वरी का वीडियो सुनकर मोटिवेट होते है और  पीएससी की तैयारी कर रहे हैं तो शायद आधे घंटे में आपका मोटिवेशन समाप्त हो जाए लेकिन यदि खुद से मोटिवेट होकर लक्ष्य लेकर हार्ड वर्क और स्मार्ट स्ट्रेटजी से कार्य करें तो सफलता जरूर मिलेगी।

इसी तरह की बातें सीजीपीएससी में चयनित पांच टापर्स ने अपने अनुभवों को साझा करने के दौरान कही। युवाओं को कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने भी गाइड किया। उन्होंने कहा कि यहां कार्यशाला के दौरान चयनित डिप्टी कलेक्टर्स का संबोधन सुना, वे उत्साह से भरे हैं और सफलता का रास्ता बता रहे हैं।

कुछ ऐसे भी हैं जो पहले प्रयास में ही चयनित हुए हैं। इनका यह उत्साह और आत्मविश्वास कड़ी मेहनत से आया है। सफलता का कोई शार्ट कट नहीं होता है। आज की कार्यशाला में आये टापर्स में सुश्री शिल्पा देवांगन,  अमित श्रीवास्तव,  विकास चौधरी,  डिगेश देवांगन और  दिलीप कुमार उईके शामिल थे।

अपर कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई ने भी युवाओं को संबोधित किया और उन्हें चयन के टिप्स दिये। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर  जागेश्वर कौशल एवं उपसंचालक जनशक्ति नियोजन  राजकुमार कुर्रे भी मौजूद रहे। 

इंटरव्यू में वेल ड्रेस जाते हैं तभी नंबर मिलते हैं, उसी तरह उत्तर का प्रस्तुतिकरण भी मायने रखता है- कलेक्टर ने बताया कि कार्यशाला में 500 विद्यार्थी आये हैं। इनमें से सभी की बौद्धिक क्षमता अलग-अलग होगी। कोई बहुत जल्दी चीजों को याद कर लेता है और किसी को समय लगता है।

सफलता का एक ही सूत्र है, यह प्रसिद्ध कथन याद रखकर चलिये कि व्हेयर इंटेलीजेंस एंड्स, हार्ड वर्क बिगेन। जिस सीमा पर बुद्धिमता चूक जाती है, वहां पर हार्ड वर्क काम आने लगता है। आप अपनी मेहनत पर निश्चय रखिये।


अपना रोल माडल उन लोगों को बनाइये जो आपकी जैसी परिस्थिति से गुजरते हैं। कलेक्टर ने छात्रों के जिज्ञासाओं का भी समाधान किया। उन्होंने कहा कि कई बार भ्रम होता है कि ज्यादा लिखने से नंबर मिलते हैं। ऐसा नहीं होता, आपके पास बताने के लिए अच्छी सामग्री होनी चाहिए, साथ ही उसका प्रेजेंटेशन भी अच्छा होना चाहिए।

उदाहरण के लिए यदि आपसे भारत-पाक संबंध की जटिलताओं पर पूछा जा रहा है तो उत्तर की प्राथमिकता तय होनी चाहिए। इसमें ट्रेड संबंधी विवाद बाद में आयेंगे और जियोपालिटिक्स से संबंधी विवाद पहले आयेंगे। ये समझ स्मार्ट रणनीति से और लगातार मंथन से बनती है।

जूम एप से भी किया डिस्कशन- डिप्टी कलेक्टर्स ने बताया कि उन्होंने खाली समय में यूट्यूब के जीएस मटेरियर पढ़े। जूम एप भी ट्राई किया, इससे आपसी डिस्कशन मजबूत हुआ। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि यह ध्यान रहें कि टेक्स्ट बुक पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। आठवीं बार में पीएससी में सफलता हासिल करने वाले टापर ने बताया कि उन्होंने टेक्स्ट बुक नहीं पढ़ने की आरंभ में गलती की, अंतिम प्रयास में यह गलती दूर की और स्वर्णिम मौका हाथ लगा।