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तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं

तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं

डॉ. ममता व्यास

आज मनवा पर बच्चों की मानसिक समस्याओं पर बातचीत....

समस्या – मेरी समस्या ये है कि मेरा बेटा दो साल का हो गया है लेकिन अभी तक बोलना नहीं सीखा है| जो भी बोलता है वो अटक अटक कर बोलता है | ज़्यादातर चुप ही रहता है | घर में और भी बच्चे हैं लेकिन वे तो बहुत अच्छे से बात करते हैं | अपने बेटे को लेकर परेशान हूँ | 

समाधान - दो साल की उम्र तक हर बच्चा बोलने लग जाता है । अगर दो साल के होने पर भी बच्चा ठीक से बात नहीं कर पा रहा तो ये उपाय करें | उसके साथ ज्यादा समय बिताएँ । बच्चे के साथ कोई गेम खेलें उससे इस दौरान ज्यादा से ज्यादा बातें करें। उसे रात में रोज कहानी सुनाएँ, लोरी सुनाये। टीवी कम देखने दे। उसके हर सवाल का जवाब देने की कोशिश करे । बच्चे की बात को बीच में काटे नहीं उसे उसकी बात दोहराने के लिए प्रोत्साहित करें।

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समस्या – मेरा दस वर्षीय बेटा घर में किसी की भी बात नहीं मानता है, जो भी पूछो या कहो तो चिल्ला कर जवाब देता है | वो हमेशा गुस्से में रहता है। मैं और मेरे पति जो भी बात उसे कहते हैं वो उसका उल्टा ही करता है। जैसे उसे कहो कि खाना खा लो तो चिल्ला कर कहेगा नहीं खाऊँगा, या नहीं नहाऊँगा या स्कूल नहीं जाऊंगा आदि उसके इस व्यवहार से हम दोनों पति पत्नी बहुत दुखी हैं। समझ नहीं आता कि हमारी परवरिश में कौन सी कमी रह गयी।

समाधान – आपकी समस्या सुनकर लगता है कि आपके बेटे को ओडीडी यानि अपोजिशनल डेफिएंट डिसऑर्डर अर्थात ओडीडी नामक मानसिक समस्या है, जिसमें बच्चा कभी भी दूसरों की बात को नहीं मानता। ऐसे बच्चों में गुस्सा व चिड़चिड़ा स्वभाव देखा जाता है। इस बीमारी से ग्रसित बच्चे हमेशा बड़ों की कही गई बात का उल्टा ही करते हैं।आप अपने शहर के किसी भी काउन्सलर या मनोचिकित्सक से मिलिये, जरूर फायदा होगा ।

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समस्या – मेरी बेटी अभी फ़र्स्ट ईयर में पढ़ती है | कई दिनों से देख रही हूँ कि उसके व्यवहार में बदलाव आ गया है। वो कभी तो बहुत खुश होकर बात करती है । घर के और बाहर के काम भी निपटा लेती है, तो कभी बहुत इमोशनल हो जाती है, बात -बात पर मुझे या अपने भाई से झगड़ पड़ती है, और रोना शुरू कर देती है। मुझे समझ नहीं आता उसका  ऐसा व्यवहार क्यों होता जा रहा, उसके लिए चिन्तित हूँ । आप बताए क्या करू ? 

समाधान – देखिये आपने जिस तरह से समस्या बताई है उसे सुनकर मुझे लगता है आपकी बेटी को मूड डिसऑर्डर हुआ है। इसमें व्यक्ति का पल-पल में मूड बदलता रहता है | कभी वो किसी बात से खुश हो जाता है तो अगले ही पल निराशा में डूब जाता है | हो सकता है आपकी बेटी डिप्रेशन में हो । आप उससे प्यार से बात कीजिये, हो सकता है वो अकेलेपन की शिकार हो | उसके साथ बाहर घूमने जाइए। इस उम्र में बच्चे बाहर की दुनिया में दोस्त खोजते हैं और अगर किसी कारण से या उनके अपने स्वभाव की वजह से दोस्त नहीं बन पाते तो वे डिप्रेशन या अकेलेपन से जूझने लगते हैं ।हो सकता है आप दिनभर अपने कामों में उलझी रहती हो और वो अकेलेपन को महसूस करती हो। आप ही उसे समस्या से बाहर ला सकती है । आप को अपनी बेटी का दोस्त बनना होगा, समस्या दूर हो जाएगी।

समस्या – मैं एक पंजाबी परिवार से हूँ ,मेरी बेटी बचपन से ही बहुत मोटी थी उस समय सभी उसे बहुत प्यार करते थे वो बहुत सुंदर भी थी। आसपड़ोस के लोग भी उसे बहुत लाड़ करते थे। मैंने भी कभी उसके मोटे होने को गंभीरता से नहीं लिया लेकिन जैसे -जैसे वो बड़ी होने लगी घर परिवार और आसपड़ोस के लोग उसे मोटी मोटी चिढाने लगे। अब वो पंद्रह साल की हो गयी है और उसका वजन बहुत ज्यादा है। उसे स्कूल में भी सभी मोटी कहते है। इस वजह से वो बहुत चिड़चिड़ी और आक्रामक होती जा रही है। मुझे लगता है मेरी बेटी कहीं डिप्रेशन में ना चली जाए | क्या करूं ? 

समाधान – देखिये, कई परिवारों में बच्चों को  बचपन से ही ज्यादा खाना खाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता हैं । हम बचपन से ही उनकी फूड हेबिट्स बिगाड़ देते हैं। मोटे बच्चों को हमारे देश में सुंदर बच्चा माना जाता है लेकिन यही मोटापा बाद में बहुत दुखदाई हो जाता है। कई बच्चे अपने मोटापे से संबंधित शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। आप सबसे पहले तो अपनी बेटी का आत्मविश्वास बढ़ाए। उससे प्यार से बात करे। उसे वजन कम करने के लिए प्रोत्साहित करे। जब आपकी बेटी का मनोबल बढ़ेगा तो वह खुद ही इन समस्याओं से निकल आएगी।