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पौधरोपणः टीम अर्जुन है तैयार, किस भूमि पर, कौन सी प्रजाति होगी सही, सर्वेक्षण

पौधरोपणः टीम अर्जुन है तैयार, किस भूमि पर, कौन सी प्रजाति होगी सही, सर्वेक्षण

भाटापारा, 6 जून। मेड़ों में करें पौधरोपण। संदेश एकदम साफ है। आने वाली पीढ़ियों के लिए वन संपदा की एक समृद्ध विरासत तैयार करना । इससे घरेलू जरूरतें तो पूरी होंगी ही, शुद्ध प्राणवायु भी मिलेगी। इतना ही नहीं, इन पेड़ों से मूल्यवान औषधियां भी हासिल की जा सकेंगी।

हर बारिश के मौसम में किया जाने वाला पौधरोपण, इस बार कुछ नए स्वरूप में पेश होगा। योजना स्कूल मैदान, चारागाह, गौठान और खलिहान से आगे निकल कर खेतों और मेड़ों में पहुंच बनाने जा रही है। योजना को पेड़ों की अंधाधुंंध कटाई के बाद जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम से सीखा गया सबक माना जा सकता है। वैसे एक बात जरूर है कि जिस व्यापक पैमाने पर तैयारी हैं, उसने यह प्रमाणित कर दिया है कि प्रकृति को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।


ऐसा है अपना छत्तीसगढ़

भौगोलिक स्थितियों को जानने की कोशिश में, यह जानकारी मिलती है कि अपना प्रदेश, छत्तीसगढ़ का मैदान , उत्तर पर्वतीय क्षेत्र और बस्तर का पठार। तीन स्थितियों में वर्गीकृत है। जहां लगभग हर प्रजाति की वन संपदा है लेकिन सभी प्रजाति तीनों क्षेत्र में मिलते हैं, ऐसा अब तक देखा नहीं गया है। इसलिए क्षेत्रवार कुछ प्रजातियों के पौधों का रोपण  किया जाना सही माना जा रहा है।

किस क्षेत्र में कौन सी प्रजाति

छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्र के लिए देसी बबूल, सफेद सिरस, काला सिरस,खम्हार, सागौन, सिस्सू, नीम, आंवला, मुनगा,  जामुन, अर्जुन, देसी बांस को सही माना जा रहा है, तो सरगुजा जिले के  उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र, देसी बबूल, सफेद सिरस, बकेन, सागौन, खम्हार ,नीम, जामुन ,मुनगा, सिस्सू, आंवला, पलाश, अर्जुन और महुआ के लिए जगह दे सकता है। बस्तर का पठार क्षेत्र सागौन, नीम, शीशम, कटहल ,काजू ,मुनगा, आंवला ,अर्जुन, खम्हार, खजूर, देसी बबूल ,देसी बांस, करंज, जामुन, सिरस और ऑस्ट्रेलियन बबूल के लिए सही रहेगा। इसके साथ तीनों क्षेत्र में फल देने वाले पौधे भी लगाए जा सकते हैं।


हैं बेहद अनमोल

जिन प्रजातियों को जिस क्षेत्र के लिए सही माना गया है, उनके अपने महत्व हैं। मुनगा इकलौता ऐसा पेड़ है, जिसके बीज से लेकर जड़ तक का हर हिस्सा कई औषधीय गुणों का खजाना है। सागौन और शीशम, मूल्यवान पेड़ हैं, तो पलाश, खम्हार और बबूल के कई घरेलू उपयोग हैं। आंवला और नीम के औषधिय गुण से आज हर कोई वाकिफ है। मतलब यह कि हर प्रजाति कोई न कोई विशेषता रखती है।

पर्यावरण बेहतर बनाने, करें प्रयास

हम सभी जानते हैं कि हमारे अस्तित्व और कल्याण के लिए पेड़ और पौधे कितने महत्वपूर्ण हैं लेकिन हममें से कितने लोग नियमित रूप से पेड़ लगाते हैं? यदि आप ऐसा नहीं कर रहे हैं तो यह समय है जब आपको इसे गंभीरता से लेना चाहिए और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए जो कुछ भी प्रयास कर सकें, उन्हें करना चाहिए।

- डॉ अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट, फॉरेस्ट्री, टीसीबी कॉलेज ऑफ एग्री एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर