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वृक्षारोपण, शिर्वाचन और रुद्राभिषेक कार्यक्रम का हुआ आयोजन

वृक्षारोपण, शिर्वाचन और रुद्राभिषेक कार्यक्रम का हुआ आयोजन

धर्मगुरु करपात्रीजी महाराजश्री के 145-वीं जन्म-जयंती के शुभ अवसर पर साक्षी बने: पीठ परिषद आदित्य  वाहिनी-आनंद वाहिनी । धर्म-सम्राट पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के गुरुवर करपात्रीजी महाराजश्री की जयंती मनाई गई।

पावन सावन के महीने में यादगार पूजा-अर्चना कार्यक्रमों से जुड़कर लोगों को अद्भुत आनंद की अनुभूति हुई,

 सावन मास के तीसरे मंगलवार की पुनीत बेला में विश्व के महान विभूति, धर्म सम्राट145-वें जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वतीजी महाराज के गुरुवर परम श्रद्धेय करपात्रीजी महाराजश्री प्राकट्य दिवस के मौके पर श्री जगन्नाथ मठ मंदिर, चांपा के प्रागंण में यादगार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंडित दिनेश कुमार दुबेजी के आचार्यत्व में वृक्षारोपण, शिर्वाचन, महामृत्युंज्य अनुष्ठान एवं रुद्राभिषेक कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय संस्था: धर्म संघ पीठाधीश्वर आदित्य वाहिनी,आनंद वाहिनी, जांजगीर-चांपा जिला इकाई द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण, विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। विश्व-शांति, कोरोना के तीसरे लहर की समाप्ति और सुख-समृद्धि की कामना के निहितार्थ में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में दो गज दूरी-बहुत जरूरी और सोशल डिस्टेशिंग का पालन करते हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। 

शिर्वाचन पूजन-अर्चन में ब्राम्हण आचार्य एवं वेदपाठी ब्राह्मणों की ओर से 108 कमल-पुष्प, बेल-पत्र,दूध दही शुद्ध देसी घी, फ़ूल फ़ूल और मिष्ठान्न आदि लेकर सबसे पहले पूजन, रुद्राभिषेक और हवन-पूजन के पश्चात् प्रसाद किया गया।आयोजन में पद्मेश शर्मा-श्रीमती पद्मा शर्मा, सिद्ध नाथ-श्रीमति रजनी सोनी,राजेश कुमार, श्रीमति सुमन पाठक, योगेश पाठक, महेंद्र गुप्ता श्रीमति शांता गुप्ता,गणेश श्रीवास,प्रदीप कुमार स्वर्णकार-श्रीमति कावेरी,उषा, गायत्री,वृंदा सोनी,अनिल कुमार सोनी, लिलेश्र्वर तिवारी ने यजमान बनकर पुण्य लाभ अर्जित किया। आचार्य श्री केदार मिश्रा ने भी पूजन अर्चन में महती भूमिका निभाया। शशिभूषण सोनी ने बताया कि मन की आत्मिक शांति और जन कल्याण की भावना से आयोजित यह रुद्राभिषेक और शिवपूजन श्रावण मास में शिव संकल्प करते हुए श्रेष्ठ कर्म की ओर प्रेरित करता हैं। इस संसार में रहते हुए जिस-प्रकार हर मनुष्य को मानव देह मिला हैं, सूक्ष्म अस्तित्व के लिए मन-मस्तिष्क मिला हैं। मन ही मनुष्य का दिव्य धाम हैं।आत्मिक सुख-शांति और सौहार्द्र के लिए धार्मिक कार्यक्रमों में लगाना वंदनीय हैं। आचार्य पंडित पद्मेश शर्माजी ने लोगों के उत्साह को देखते हुए भगवान भोलेनाथ की कथा का संक्षिप्त वाचन किया। श्रद्धा-भक्ति पूर्वक महाआरती में उत्साह और उमंग नज़र आया। दिनेश कुमार दुबे ने कहा कि भगवान भोलेनाथ के प्रति अनुराग और समर्पण ही हैं कि हर वर्ष पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वतीजी के गुरु करपात्रीजी के जन्मदिन पर यह आयोजन होता हैं। जगन्नाथ मठ मंदिर के देवालय में यह दिव्य आयोजन श्रद्धा-भक्ति को दर्शाता हैं। जैसा कि शशि भूषण सोनी ने इस संदर्भ में यह जानकारी दी