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14वीं सदी में प्लेग ने मचाई थी भयंकर तबाही, मारे गए थे करोड़ों लोग

14वीं सदी में प्लेग ने मचाई थी भयंकर तबाही, मारे गए थे करोड़ों लोग


नईदिल्ली।  19वीं सदी में प्लेग की शक्ल में खौफनाक तबाही  चीन में देखने को मिली थी ।  1860 के दशक में प्लेग की वजह से अकेले चीन में करीब 25 लाख लोगों की मौत हो गई थी।  ये वही प्लेग था, जिसने चीन के बाद भारत का रुख किया और भारत में भी भयंकर तबाही मचाई।   आंकड़े के मुताबिक उस दौर में भारत में प्लेग से करीब एक करोड़ से ज़्यादा लोगों की जान चली गई थी। 

चीन के वुहान से निकला ये वायरस दुनिया में एक और तबाही की वजह बन चुका है. मगर ऐसा ना हो कि इससे मरने वालों का आंकड़ा उस आंकड़े को भी पार कर जाए जो इंसानी तारीख में सबसे ज़्यादा मौतों का है।  ये सवाल इसलिए क्योंकि 690 साल पहले 14वीं सदी में चीन के चूहों से फैले प्लेग ने यूरोप में जिस तरह का तांडव मचाया था। 

14वीं सदी में यूरोप में प्लेग से होने वाली मौतों को ब्लैक डेथ यानी काली मौत कहा गया।  चीन से यूरोप आई इस महामारी से 1347 से 1351 तक यानी चार सालों में यूरोप की करीब 2 से 3 करोड़ आबादी खत्म हो गई थी। 

 खौफनाक महामारी  प्लेग से चीन और भारत में मिलाकर सवा करोड़ से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी।  यूके की डिफेंस इवेल्युएशन एंड रिसर्च एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले भारत में ही प्लेग से 1 करोड़ लोगों की मौत हुई थी।  वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, प्लेग के वायरस 1959 तक एक्टिव रहे थे।   भारत में प्लेग की एंट्री पोर्ट सिटी हांगकांग के जरिए ब्रिटिश इंडिया में हुई थी।  तब इसका असर सबसे ज्यादा मुंबई, पुणे, कोलकाता और कराची जैसी पोर्ट सिटी में ही दिखा था।  

कोरोना वायरस का कोई इलाज या टीका नहीं बन सका है।  वायरस को बढ़ने से रोकने के लिए अहम है कि WHO यानी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन इस बीमारी के इलाज के लिए दुनिया भर के देशों की सरकारों के साथ काम करे। जैसा आज कोरोना वायरस किसी एक देश की समस्या नहीं बल्कि ग्लोबल महामारी बन चुका है। 

chandra shekhar