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क्रिकेट से कोरोना का डर 'आउट, वीआईपी कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ा रहे, आम जनता 100-200 रूपये का जुर्माना पटा रही, सरकार और प्रशासन क्रिकेट पर नरम, होली पर सख्त

क्रिकेट से कोरोना का डर 'आउट, वीआईपी कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ा रहे, आम जनता 100-200 रूपये का जुर्माना पटा रही, सरकार और प्रशासन क्रिकेट पर नरम, होली पर सख्त
  • रायपुर. कुछ चित्रों में हजार शब्द की गाथा छुपी होती है इसलिए इन चित्रों को देखिए और समझिए कि क्रिकेट के कारण कोरोना का डर किस कदर 'आउट' हो चुका है. आम हो या खास, चेहरों से मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग इस तरह गायब है मानो कोरोना सबको बख्श चुका है! पहली तस्वीर नया रायपुर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में चल रहे क्रिकेट मैच की है जहां 15 हजार से ज्यादा दर्शक मौजूद होंगे लेकिन चेहरों पर मास्क उंगलियों पर गिनने लायक हैं! दूसरी तस्वीर राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित बड़े नेताओं की है जिन्हें वीआईपी समझकर मास्क ने खुद ही दूरी बना ली होगी शायद! तीसरी तस्वीर एक वीडियो की है जिसमें महापौर एजाज ढेबर बिना मास्क के स्टेडियम में अपने समर्थकों के साथ गुजर रहे हैं और भीड़ से आवाज आती है : मास्क कहां है मास्क!
लापरवाह डॉक्टर्स...सजग मंत्री

इसके विपरीत दो दृश्य आशा और विश्वास जगाते प्रतीत होते हैं. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव एक होटल में आयोजित डॉक्टर्स के कार्यक्रम में हैं. फोटोसेशन के दौरान सभी डॉक्टर मास्कलेस' हैं लेकिन सिंहदेव स्वास्थ्य मंत्री होने की नैतिक जिम्मेदारी अता करते हुए चेहरे पर मास्क लगा रखे हैं. क्रिकेट देखने पहुंचे बहुत से पदमश्रियों में से कुछ ने मास्क लगा रखे हैं. कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े भयावह हैं. तीन दिनों के अंदर ही 200 से ज्यादा नए मरीज मिले हैं. पड़ोसी दुर्ग जिले में 135 नये कोरोना संक्रमित सामने आए हैं. दु:खद कि 11 लोगों की मौत हो गई है.

3897 मौतें, 200 से ज्यादा नए मरीज

प्रदेश में कुल सक्रिय मरीजों की संख्या 4006 तक पहुंची है.एक साल के बाद खुल रहे स्कूल और कॉलेज में कोरोना विस्फोट हुआ है. इसी डर से रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने 9वीं—11वीं की परीक्षा आनलाइन कराने का आदेश जारी कर दिया है. हमारे पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश के कई शहरों में लॉकडाउन या फिर नाईट कफर्यू लगा दिया गया है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव की रिपोर्ट के मुताबिक 15 मार्च तक 3897 लोगों की मौत हो चुकी है, 317974 लाख पाजिटीव पाए गए हैं जिनमें 103213 डिस्चार्ज हो गए हैं तथा 206766 लाख लोग होम आइसोलेट हैं. लेकिन ऐसी चेतावनियां तब तक पूरी तरह असर नहीं करतीं, जब तक हमारी चमड़ी में उनका डंक न प्रविष्ट कर जाए!

क्रिकेट पर नरमी, होली पर सख्ती

कोराना का नया हब नया रायपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बन चुका है. मैच को देखने पहुंचे हजारों दर्शक बिना मास्क के और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए बगैर कोरोना महामारी का खतरा उठा रहे हैं. सोशल मीडिया में इसका विरोध शुरू हुआ तो सरकार को आदेश जारी करना पड़ा कि इसके बगैर स्टेडियम में प्रवेश नही दिया जाएगा! बिना ट्रायल के कोरोना वेक्सीन लगाने का विरोध कर रहे स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव जब कोरोना संक्रमित हुए तो उसके बाद उन्होंने भी अपनी जिद छोड़ते हुए वेक्सीन लगाने का आहवान राज्य की जनता से कर डाला. सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना हुई तो अंतत: फरमान जारी करना पड़ा कि बिना मास्क के स्टेडियम में प्रवेश नही दिया जाएगा.


आम जनता पटा रही 100 से 200 तक जुर्माना

एक तरफ इस तरह के आदेश निकाले जा रहे हैं तो दूसरी ओर वीआईपी ही इसकी धज्जियां उड़ाने में लगे हैं. गरीब जनता जुर्माने में पिस रही है. बिना मास्क के निकल रही आम जनता से चौक—चौराहों में नगर निगम की टीमें 100 से 200 रूपये की वसूली कर रही हैं तथा होली सहित कई त्यौहारों पर प्रशासन कोरोना नियमों का हंटर बरसा रहा है लेकिन क्रिकेट स्टेडियम से मुंह मोड़ लिया गया है.

सरकार को मत कोसिए, मास्क लगाइए

समाज वैज्ञानिकों के मुताबिक 35 हजार दर्शक क्षमता वाले स्टेडियम में यदि औसतन 15 हजार लोग भी क्रिकेट मैच देखने पहुंच रहे होंगे तो अंदाजा लगाइए कि दस दिनों में ही कम से कम डेढ़ लाख लोग कोरोना की जद में आ चुके होंगे. इसका असर आपको एक महीने बाद पता चलेगा जब कोरोना विस्फोट होगा और अस्पताल में बिस्तर कम पड़ जाएंगे. मध्य दृश्य में हम पाते हैं कि गर्मी गहराने के साथ कोरोना की तीसरी लहर की मारक क्षमता बढ़ती जा रही है. अस्पतालों के बिस्तर भरते जा रहे हैं और एक बार फिर चिकित्सा का संकट विकराल हो रहा है. जिस वेक्सीन का इंतजार हमने दम साधकर किया, वह भी पूरा साथ कहां दे रही है अन्यथा दो—दो वेक्सीन लगने के बाद भी क्या कलेक्टर कोरोना संक्रमित होते या 80 वर्षीय वृद्धा दम नही तोड़ती.

रविन्द्रनाथ ठाकुर की एक कविता इन परिस्थितियों पर फिट बैठती हैं :
तुम्हें काल नही ले जा सकता था,
जब काल तुम्हारे सामने याचना के लिए आया,
तब तुमने उसकी झोली में अपना जीवन दान कर दिया..!