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विदेशी ई-कॉमर्स कम्पनी अमेजन और फ्लिपकार्ट के एफडीआई नियमों का उल्लंघन करने के खिलाफ कैट ने की सख्त कार्रवाई की मांग

विदेशी ई-कॉमर्स कम्पनी अमेजन और फ्लिपकार्ट के एफडीआई नियमों का उल्लंघन करने के खिलाफ कैट ने की सख्त कार्रवाई की मांग

रायपुर। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी,कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल ने बताया कि ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़ॅन और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट द्वारा लगातार सरकार की नीतियों का घोर उल्लंघन करने के मुद्दे पर  अपनी लड़ाई जारी रखते हुए, कैट ने आज इन कम्पनियों के मनमाने रवैए एवं एफडीआई मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग की। "यह एक अजीब स्थिति है जहां ई-कॉमर्स कम्पनियाँ  नीति और कानून का उल्लंघन कर रहे हैं और उनके खिलाफ अनेक शिकायते भी की जा रही है, पर अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है, यही कारण है कि  मजबूर हो कर कैट ने देश भर में 20 नवम्बर से 40 दिनों के निर्णायक युद्ध अभियान शुरू करने किया है",

अमेज़ॅन के खिलाफ शिकायत करते हुए, कैट ने  गुरुप्रसाद महापात्र, सचिव,आंतरिक व्यापार एवं उद्योग संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को ज्ञापन भेज कर कैट  ने अधिनियम, 1999 के तहत सख्त कार्रवाई तथा दंड की मांग की।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष   अमर पारवानी ने कहा कि ई-कॉमर्स के इन्वेंट्री-आधारित मॉडल के लिए एफडीआई में अनुमति नहीं है, बावजूद इसके ये ई कॉमर्स कम्पनियाँ परोक्ष रूप से भारतीय कंपनियों को नियंत्रित कर रहे है । इनके द्वारा किए गए प्रमुख उल्लंघनों में से एक अमज़ोन द्वारा  फ्यूचर रिटेल लिमिटेड जो एक बहु-ब्रांड रिटेलर कम्पनी है  पर नियंत्रण का स्वयं का दावा शामिल है। 

 पारवानी  ने कहा कि भारत में अमेज़न और वालमार्ट की मौजूदा गतिविधियां अनेक प्रकार के सवाल उठाती हैं, जैसे क्या राष्ट्र की संप्रभुता बनी रह सकती है जब तक अमेज़न और वालमार्ट जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश के कानूनों को रौंदने की अनुमति मिलती रहेगी? क्या इन बड़े वैश्विक कंपनियों को  जो भारत के लोगों के हितों के विपरीत काम करते हैं उन्हें आज़ाद छोड़ दिया जायेगा?  रिपब्लिक नही बल्कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यह कानून के शासन द्वारा शासित है देश है?

 पारवानी   ने डीपीआईआईटी सचिव को भेजे अपने ज्ञापन में कैट ने अमज़ोन  पर  विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 की धारा 13 के तहत जुर्माना लगाने की मांग की है, जो निवेश का तीन गुना है, जो फेमा नियमों के उल्लंघन में भी आता हैं। खुदरा व्यापार भारतीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है और भारतीय आबादी के 25% से अधिक लोगों को रोजगार और आजीविका प्रदान करता है। 

पारवानी ने कहा कि फेमा नियम उन हजारों छोटे और मझोले उद्यमों के हितों की रक्षा करने के लिए हैं, जो संभवतः असीमित संसाधनों के चलते विदेशी कंपनियों के खिलाफ खड़े नहीं हो सकते हैं जिनको दुनिया भर में जिस  भी देश मे जाने की अनुमति मिली वहां उन्होंने स्थानीय उद्योग को नष्ट करने का रिकॉर्ड  बनाया है। अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट (वॉलमार्ट) दोनों कंपनियां विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों, 2019 का खुलेआम उल्लंघन कर अपना संचालन कर रही हैं। पर ऐसा करते समय, वे इस तथ्य से पूरी तरह से बेखबर हैं कि भारत  एक बनाना गणराज्य नहीं है बल्कि यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यह कानून द्वारा शासित देश है। इसलिए, उन्हें तुरंत भारतीय कानून का उल्लंघन करना बंद करना चाहिए।