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महंगाई: दीपावली के शुभ-लाभ और वेलकम भी महंगा, पढ़िए-और किन-किन चीज़ो में हुई बढ़ोतरी

महंगाई: दीपावली के शुभ-लाभ और वेलकम भी महंगा, पढ़िए-और किन-किन चीज़ो में हुई बढ़ोतरी

भाटापारा। लगातार बढ़ती महंगाई ने मध्यवर्गीय लोगो का जीना बेहाल कर दिया है। 20 प्रतिशत की तेजी के बाद शुभ-लाभ, वेलकम, स्वागतम और बंदनवार की खरीदी महंगी हो चली है। शेष कसर, वह कृत्रिम फूल पूरी करेंगे जिन्हें दीप पर्व पर मुख्य द्वार और पूजा घरों में लगाया जाना है। इसके अलावा ऐसी सामग्रियां भी महंगाई की चपेट में आ चुकीं हैं जिनका उपयोग सजावट के लिए किया जाता है।

दीप पर्व के लिए जरूरी सामग्रियों का बाजार सज कर तैयार है। कोरोना संक्रमण से मुक्त होते बाजार में नजदीक आते पर्व- त्यौहार की मांग निकल चुकी है लेकिन इस मांग में महंगाई बड़ी बाधा बन रही है। लगभग हर सामग्री की बढ़ती कीमत के बाद, खरीदी तो चल रही है लेकिन घट चुकी मात्रा से कारोबारियों की सांस अटकने लगी है क्योंकि अब लाभ तो दूर  स्टॉक क्लियर कैसे किया जाए? इसकी चिंता सता रही है। लाभ का प्रतिशत या कीमत भी कम नहीं की जा सकती क्योंकि होलसेल मार्केट से ही बढ़ी हुई कीमत में खरीदी की गई है।

शुभ-लाभ 5 से 100 रुपए

दीप पर्व पर संस्थान और निवास के मुख्य द्वार में यदि पेपर से बना शुभ-लाभ लगाना है तो 5 से 20 रुपए तैयार रखें। गुणवत्ता चाहिए तो रकम बढ़ा लीजिए। मोतियों से बने शुभ-लाभ की खरीदी 100 रुपए में करनी पड़ सकती है। यदि इसे आकर्षक डिजाइन में चाहते हैं, तो पैसे और ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे।

10 से 500 में वेलकम

शुभ- लाभ के बाद, बारी है वेलकम की। जान लीजिए, इसके लिए भी जेब ढीली करनी पड़ेगी। साधारण पेपर में अंकित, वेलकम 10 से 20 रुपए में लिया जा सकेगा। मोतियों से बना डिजाइनर वेलकम लेना है तो रकम की मात्रा 500 रुपए तक जा सकती है। यानी स्वागतम पर भी महंगाई ने नजर लगा दी है।

पसीना छुड़ाएगा बंदनवार

शुभ-लाभ, वेलकम की खरीदी के बाद, आइए बंदनवार या तोरण के काउंटर की तरफ। इसकी खरीदी से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए निकाल कर रखें 200 से 500 रुपए क्योंकि इससे कम में यह शायद ही कहीं मिलें। बता दें कि इसमें डिजाइनों की भरमार है। इसलिए अंतिम पसंद ही, खर्च की जाने वाली रकम तय करेगी।

इसलिए आई तेजी

कोरोना और लॉकडाउन की वजह से दिल्ली, इंदौर, कोलकाता की यूनिटों में लंबे समय के बाद मशीनें परिचालन में आईं हैं लेकिन चलाने वाले हुनरमंद हाथ अब भी पर्याप्त संख्या में नहीं पहुंचे हैं। इसलिए जैसे-तैसे करके बढ़ी हुई मजदूरी में काम करवाया जा रहा है, इसलिए कीमतों ने तेजी ली हुई है।