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अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर उनकी मशहूर कविता...

अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर उनकी मशहूर कविता...


गीत नया गाता हूं


टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर,

पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर,

झरे सब पीले पात,

कोयल की कूक रात,

प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूं

गीत नया गाता हूं


टूटे हुए सपनों की सुने कौन सिसकी?

अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी

हार नहीं मानूंगा,

रार नई ठानूंगा,

काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं

गीत नया गाता हूं.


मौत से ठन गई


Former PM Atal Bihari Vajpayee started out as an MP from this constituency


ठन गई!

मौत से ठन गई!


जूझने का मेरा इरादा न था,

मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,


रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,

यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई


मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,

ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं


मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,

लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?


तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,

सामने वार कर फिर मुझे आज़मा


मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,

शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर


बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,

दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं


प्यार इतना परायों से मुझको मिला,

न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला


हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,

आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।


आज झकझोरता तेज तूफान है,

नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है


पार पाने का कायम मगर हौसला,

देख तेवर तूफां का, तेवरी तन गई