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ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण परेशान जंगल से एकत्र किए वनोपज को बेचने की है परेशानी

ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण परेशान जंगल से एकत्र किए वनोपज को बेचने की है परेशानी


जीवनयापन का सहारा है वनोपज, लॉकडाउन के चलते बंद है सफ्ताहिक बाजार 

नारायणपुर, 16 मई। नारायणपुर जिले के ग्रामीण इलाके के ग्रामीणों का जीवनयापन का प्रमुख साधन जंगल से मिलने वाला वनोपज है जिसे वे एकत्र कर साफ़्तहिक बाजारों में बेचकर अपने जरूरत की सामग्री के साथ राशन की सामग्री की खरीदारी करते है लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते पिछले एक महीनों से सफ्ताहिक बाजार बंद हो जाने से इन ग्रामीणों के सामने जीवनयापन के लिए जरूरी सामानों की खरीदी नही कर पा रहे है क्योंकि वे अपना वनोपज नही बेच पा रहे है । ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को ग्रामीण इलाके के लोगो के लिए उनके वनोपज की बिक्री के लिए व्यवस्था करनी चाहिए ताकि हम इन कोरोना काल मे जीवनयापन करने में परेशानी ना हो ।

ज्ञात हो कि नारायणपुर जिले के ग्रामीण इलाके के ग्रामीण जंगल से मिलने वाले वनोपज आम , महुवा , टोरा , बेहड़ा , चार बीजा , छिंद , भेलवा आदि का संग्रहण करते है और सफ्ताहिक बाजारों में जाकर अपनी एकत्र की हुई वनोपज को बेचकर अपना जीवनयापन करते है । ग्रामीणों के जीवनयापन का सबसे प्रमुख साधन जंगल से मिलने वाला ये वनोपज है लेकिन पिछले एक माह से कोरोना के चलते सफ्ताहिक बाजारों को बंद कर दिया गया है जिसके चलते ग्रामीणों के सामने अपनी वनोपज बेचने की समस्या सामने आ गई है जिसके चलते वे काफी परेशान है । ग्रामीणों की मांग है कि सरकार उनकी समस्याओं को दूर करने की व्यवस्था करनी चाहिए जिससे उन्हें जीवनयापन करने में परेशानियों का सामना करना ना पड़े ।