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अतिबला को जानते हैं, कोरोना काल में बढ़ रहा इस पौधे का महत्व

अतिबला को जानते हैं, कोरोना काल में बढ़ रहा इस पौधे का महत्व


राजकुमार मल

भाटापारा, 13 मई।  अतिबला, एक ऐसा पौधा, जो खरीफ में धान फसल की कटाई के दिनों में नजर आता है। कोरोना काल में इस पर हुए प्रारंभिक अनुसंधान में यह जानकारी सामने आई है कि इनके पौधों में भी बेहद महत्वपूर्ण तत्व हैंं। जिसके अनुसार सिर दर्द, बुखार ,संक्रमण रोकने के अलावा कई रोग दूर किया जा सकता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता इस समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। संबंधित मरीजों को दवाइयां भी दी जा रही हैं। लिहाजा केंद्रीय आयुष मंत्रालय की सलाह के बाद, ना केवल संबंधित दवाओं बल्कि अर्क के सेवन की एडवाइजरी भी जारी की जा रही है। इस बीच एक ऐसे पौधे पर अनुसंधान का दायरा बढ़ाया जा रहा है, जिसमें महत्वपूर्ण तत्वों के होने की जानकारी सामने आई है। बता दें कि इस पौधे के तत्वों का पैक, पाउडर के रूप में भी आयुर्वेदिक दवा विक्रेता संस्थानों में विक्रय किया जा रहा है और आयुर्वेदिक चिकित्सक सलाह पर्ची भी लिख रहे हैं।


चूहों पर पहला अध्ययन

अतिबला उस पौधे का नाम है,जो खरीफ फसल की कटाई के दौरान खेत की मेड़़ या खलिहान में दिखाई देते हैं। इसका पौधा कई प्रकार की स्वास्थ्यगत समस्या दूर करने में सक्षम है। प्रारंभिक शोध, जो चूहों पर हुआ है ,उसमें बुखार  और किसी भी प्रकार का संक्रमण रोकने में सक्षम होने की जानकारी सामने आई है।

मिले यह तत्व भी



व्यापक अनुसंधान में अतिबला के पौधों को एलर्जी, बुखार, संक्रमण ,सिरदर्द ,बवासीर और ब्लड शुगर को रोकने में सक्षम पाया गया है। इसके अलावा इसमें लीवर को स्वस्थ और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के गुण मिले हैं, लेकिन सेवन के पहले चिकित्सकीय परामर्श का लिया जाना अनिवार्य माना गया है। 

शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, सहायक प्राध्यापक डॉ विवेक महालवर ने बताया कि अतिबला महत्वपूर्ण गुणों से युक्त है, लेकिन सेवन के पहले चिकित्सकीय परामर्श का लिया जाना जरूरी होगा।