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जांच अधिकारी का तबादला,कार्यवाही पड़ी धीमी

जांच अधिकारी का तबादला,कार्यवाही पड़ी धीमी



कन्हैया गावड़े का मामला, शासकीय कर्मचारी के कार्यप्रणाली संदेह

भानुप्रतापपुर। *कन्हैया लाल गावड़े के रहस्यमय मौत* को लेकर पूर्व में समाचार प्रकाशित किया गया था। जिस पर जमीन विवाद से जुड़े मामले को देखते हुए *राजस्व विभाग* ने मामले की जांच के लिए *तहसीलदार आनंदराम नेताम को जांच अधिकारी नियुक्त* किया गया था। लेकिन *16 जुलाई 2021* को उन्हें कांकेर में पदस्थ कर दिया गया जिससे यह जांच के मामले लटकते हुए नजर आ रहा है।

एक ओर आदिवासी के द्वारा *ज्ञापन एवं धरना प्रदर्शन* जारी है, एवं दूसरी ओर जांच अधिकारी को हटा दिया गया।

इस मामले को लेकर अब तक कोई दूसरा *जांच अधिकारी नियुक्त नही* किया गया।

विदित हो कि मृतक कन्हैया गावड़े पिता घसिया राम जाति गोड निवासी कन्हारगाव द्वारा पूर्व में अपने *कृषि भूमि खसरा न 86/3 में से 0.90 एकड़ भूमि का सौदा 36 लाख,90 हजार* रुपये में *नवकार ज्वेलर्स के संचालक अमृत, खेमराज, मुकेश*, के साथ किया गया। लेकिन उक्त भूमि की राजिस्ट्री मात्र *2 लॉख 16 हजार* में किया गया। इनके द्वारा शासन को गुमराह करते हुए राजस्व को भी क्षति पहुंचाई है, इनमें शासकीय अधिकारी व कर्मचारियों के मिली भगत से इंकार नही किया जा सकता।


मृतक कन्हैया गावड़े के पीएनबी शाखा भानुप्रतापपुर के सेविंग खाता क्रमांक *7248000100075994* से 30 लाख रुपये 9 फरवरी 2021 को

नवकार ज्वेलर्स के संचालक द्वारा जमा कराए गए एवं तीन दिन के अंतराल में ही मृतक को डरा धमका व मारपीट करते हुए हस्ताक्षर करवाते

सुनियोजित तरीके से उक्त राशि को वापस निकाल भी लिए गये जो मृतक के शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से जाहिर किया गया है।

जमीन का सौदा *नवकार ज्वेलर्स* के संचालक ने किया लेकिन उक्त भूमि की *रजिस्ट्री* अपने नौकर *गिरधारी पुजारी संबलपुर* के नाम से किया गया। इससे शासन को गुमराह करते हुए विक्रेता को भी अंधेरे में रखा गया।

दल्ली नाका के पास स्थित *शौर्य हाडवेयर के संचालक के नाम से मृतक पर दबाव बनाते 10 लाख रुपये* बेवजह दिए गए। मृतक कन्हैया ने आवेदन में कहा था कि मैं न शौर्य हाडवेयर के संचालक को जानता हूँ और न ही कभी कोई सामग्री खरीदी है,बावजूद 10 लाख का भुगतान कर दिया गया।

बैंक के कार्यप्रणाली भी संदेह कि घेरे में है यदि बैंक के नियम देखे तो सेविंग खाते से बिना पेनकार्ड के *50 हजार से ऊपर के राशि निकालने में लोगों के पसीने छूट* जाते है इसके बावजूद भी राशि नही मिल पाती है,लेकिन *बैंक कर्मचारी* की मेहरबानी देखो के एक सामान्य खाता से बिना पेनकार्ड से 5 लाख रुपए *सेल्फ चेक* के माध्यम से नगद दे दिए इनके अलावा मात्र तीन दिन याने 9 फरवरी से 12 फरवरी के बीच 30 लाख रुपये का आहरण कर दिए गए।


पुलिस की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में नज़र आ रहे है। मृतक जब जीवित था तब मारपीट, दबाव डालकर राशि आहरण व फर्जी राजिस्ट्री की शिकायत पुलिस थाना में करने गया तो उसे ही झूठ बोलता है बोलकर थाने से भाग दिया गया व जिले के उच्च अधिकारियों से भी शिकायत किया गया लेकिन मृतक के फरियाद को किसी ने नही सुना। समय रहते मृतक के शिकायत पर मामले को गंभीरत से संज्ञान में लेते हुए जांच व कार्यवाही की गई होती तो शायद मृतक आज हम सभी के बीच मे जीवित होता।

मजे की बात यह है कि मृतक के शिकायत आवेदन को देख जाए तो मामला स्पष्ट होना प्रतीत हो रहा है। पर जाँच मृतक के शिकायत पर नही अपितु समाचारो में आया हूँ तथ्यों में हो रहा है आज भी *मृतक के शिकायत* को दर किनारे रखा गया है ।इसके बावजूद भी जांच व कार्यवाही में लेटलतीफ़े समझ से परे लगता है।