विश्व स्वास्थ्य दिवस: घर पर रहकर ही कोरोना से बच सकती है जान

विश्व स्वास्थ्य दिवस: घर पर रहकर ही कोरोना से बच सकती है जान

एएनएम जेठिया कोसले कोरोना महामारी से बचने कर रही आह्वान

रायपुर, 7 अप्रैल। कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी के प्रति जागरूक रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। देश भर में ल़ॉकडाउन है ऐसे समय में लोगों को घर में रहने और दूसरों से ज्यादा मेल-मिलाप नहीं करने की हिदायत दी गई है। माना जा रहा है यह वक्त कोरोनावायरस संक्रमण फैलाव का सबसे सक्रिय काल है। इस दौरान “घर पर रहकर ही कोरोना से बच सकती है जान” का अलख जिला अस्पताल की वरिष्ठ एएनएम जेठिया कोसले जगा रही हैं।

एएनएम दीदी के नाम से प्रसिद्ध जेठिया बताती हैं “ मुझे कोरोनावायरस संदिग्धों की सीधी सेवा करने का अवसर तो नहीं मिला जिसका मुझे अफसोस है, परंतु अस्पताल पहुंचने वाले या घर के आसपास रहने वाले लोगों की सेवा का अवसर मुझे मिला है यह ईश्वर की कृपा है। मुझे अस्पताल में रहकर लोगों की सेवा करने और कोरोना महामारी से बचने जागरूकता फैलाने का अवसर आला अधिकारियों ने दी है। उन्हें मुझपर विश्वास है, जिस पर मैं खरा उतरूंगी।“


एएनएम जेठिया कहती हैं घर में ज्यादा समय रहने और बाहर नहीं आने-जाने की वजह से लोगों को कई तरह से परेशानी हो रही है। ऐसे में मानसिक तनाव, अवसाद, अकेलापन ( जो परिवार के साथ नहीं हैं)  या बोरियत हो सकती है। इतना ही नहीं मधुमेह, उच्च रक्तचाप वाले मरीजों ( जिन्हें बाहर टहलने की आदत है) ऐसे समय में उन्हें परेशानी हो रही है। शुगर और बीपी की दवाएं खाने के बावजूद उन्हें कुछ समस्या हो रही हैं। इस समय ऐसे मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इसलिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों, घर व आसपास के लोगों को लॉकडाउन के दौरान कोरोना से बचाव की जानकारी दे रही हैं। अस्पताल में सेवा देने के बाद वे घर एवं आसपास के लोगों को मास्क पहनने, हाथों की सफाई, सामाजिक दूरी बनाकर रखने, सामान्य टीकाकरण के लिए अस्पताल नहीं जाने, अस्पताल में मरीज के साथ भीड़ नहीं लगाने, हाथों को हर घंटे साबुन से धोते रहने, घर से बाहर निकलने पर मुंह को कपड़े या मास्क से ढंककर निकलने, खांसते या छींकते समय मुंह पर रूमाल, टिश्यू या कपड़ा रखने जैसी सलाह दे रही हैं।

1997 से एएनएम का कार्य करने वाली जेठिया बताती हैं शादी के बाद उन्हें एएनएम के रूप में सेवा करने का अवसर मिला। पति और ससुराल के लोगों की प्रेरणा से एएनएम बनीं। “आज मुझे खुद पर गर्व है कि मैं एएनएम के रुप में सेवा दे रही ही हूं। खासकर कोरोना महामारी के दौरान प्रत्यक्ष रूप से ना सही मुझे परोक्ष रूप से लोगों को वायरस को रोकने के लिए जागरूक करने का अवसर मिला है। अपनी जिम्मेदारी समझते हुए समाज में कोरोना जागरूकता की अलख जगाते रहूंगी जब तक महामारी खत्म ना हो जाए।“  

एएनएम जेठिया कहती हैं “मैं तो भगवान से यही दुआ करती हूं कि यह सब ठीक हो जाएं। जब लोग कहना नहीं मानते हैं तो उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता होती है। कभी-कभी तो  कुछ नासमझ तो हमारी सेवा भावना को नहीं देखते हैं।  उनको लगता है हम जबरदस्ती उनके स्वास्थ्य का ख्याल रख रहे हैं , यानि हमारा ही कुछ स्वार्थ होगा उन्हें समझाने के लिए। ऐसे लोगों को समझाना होगा कि स्वास्थ्य विभाग का कोई भी कर्मचारी आपके स्वास्थ्य के लियें उतना ही जिम्मेदार और वफादार है जितनी एक मां अपने बच्चे के प्रति होती है।“