सक्ती में विश्व क्षय दिवस मनाया गया

सक्ती में विश्व क्षय दिवस मनाया गया

सक्ती, 24 मार्च। टीबी (क्षय दिवस) आज संपूर्ण विश्व के लिये एक विकराल समस्या बनती जा रही हैं। प्रत्येक वर्ष लाखों लोग इस गंभीर बीमारी के चलते अपनी जान गंवा देते है। प्रति वर्ष टीबी के कारण जान गंवाने वाले लोगों में से 27% भारत में से है। यह आंकड़ा हम भारतीयों के लिये काभी चिंताजनक हैं। टीबी के बढ़ते प्रकोप को कम करने के लिये तथा लोगों को इसके बारे में जागरूकता पैदा करने के लिये प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को विश्व क्षय दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।  ब्लॉक टीबी सुपरवाइजर विनोद राठौर द्वारा टीबी की जानकारी दी गई । 


उन्होंने बताया कि प्रति वर्ष सक्ती में 200 से 250 मरीज टीबी से ग्रसित होते  हैं, जो उनके रिकॉर्ड में हैं जिसमें कम से कम 80 से 100 मरीज स्पुटम पॉजिटिव होते हैं जो सही तरीके से या दवा नहीं खाने के कारण वर्ष में 10 से 15 व्यक्तियों में फैलाते हैं।। उन्होंने बताया कि  टीबी एक संक्रामक रोग है जो हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खाँसने या छीकने से फैलता हैं, जो माइकोबैक्टेरियम  ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टेरिया के कारण होता हैं और जिस ब्यक्ति की इम्युनिटी पॉवर कम होगी उसे टीबी होने सम्भावना बढ़ जाती हैं। 

इसकी खोज सन 1882 में जर्मनी के चिकित्सक डॉ रॉबर्ट कोच ने की थी। टीबी के दो प्रकार हैं-1 पल्मोनरी टीबी जिसे फेफड़ों की टीबी कहते हैं। 2 एक्स्ट्रा पल्मोनरी जिसे फेफड़ो से बाहर जैसे पेट की टीबी, हड्डी की टीबी, मस्तिष्क की टीबी आदि आते हैं। टीबी के लक्षण हैं- दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार आना, वजन घटना, भूख न लगना, बलगम में खून आना। जांच के तरीके हैं- बलगम जांच, सिबिनाट के माध्यम से जांच, एक्सरे के माध्यम से टीबी की जांच की जा सकती हैं। टीबी होने पर 6 माह की नियमित दवा लेने पर मरीज पूर्णतः ठीक हो जाते हैं। बचाव के तरीके -  जन्म के समय सभी बच्चों को बीसीजी का टीका लगवाये,  सार्वजनिक स्थानों पर छीकने थूकने से बचें, मुंह मे कपड़े या हाथ रख कर खाँसे, अपने आसपास की जगह को साफ और स्वच्छ रखें, घर मे खिड़की दरवाजें खुले दार हो, कोई भी व्यक्ति नशा का सेवन न करें।