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फांसी की सजा के मामले में आया नया मोड़, सीएमओ से मांगी जांच रिपोर्ट

फांसी की सजा के मामले में आया नया मोड़, सीएमओ से मांगी जांच रिपोर्ट

नैनीताल। देहरादून के त्यूणी में नाबालिग की दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में दोषी ठहराये अभियुक्त की फांसी की सजा के प्रकरण में गुरुवार को नया मोड़ आ गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अपने को निर्दोष बताते हुए निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कुछ तथ्यों की अनदेखी की है।

घटनाक्रम के अनुसार फरवरी, 2016 में देहरादून के त्यूणी में नेपाली मूल की एक नाबालिग बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गयी थी। मामले को आत्महत्या का रंग देने के लिये शव को पेड़ पर लटका दिया गया था। हत्यारा फरार हो गया। पुलिस ने जांच में आये तथ्यों के आधार पर देहरादून के डाक पत्थर के अम्बाडी निवासी एवं पेशे से चालक मोहम्मद अजहर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को सिरमौर (हिमाचल) गिरफ्तार कर लिया गया था।

मामला देहरादून के फास्ट कोर्ट (पोक्सो कोर्ट) में चलाया गया। विशेष न्यायाधीश रमा पांडे ने 12 दिसंबर, 2018 को आरोपी को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। साथ ही मामले को पुष्टि के लिये उच्च न्यायालय भेज दिया।

विगत 25 अक्टूबर को मामला सुनवाई के लिये आया और अदालत ने प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत में पेश करने को कहा। न्यायमित्र अधिवक्ता मनीषा भंडारी की ओर से आज अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया कि घटना के दौरान अभियुक्त मो. अजहर बुरी तरह से घायल था और उसका दायां कालर बोन टूटा था और उसका दायां हाथ भी काम नहीं कर रहा था।

इसके बावजूद अभियुक्त शव को दुष्कर्म के बाद पेड़ पर लटकाने के लिये कैसे ले गया? यह भी कहा गया कि पोक्सो अदालत ने सुनवाई के दौरान इस तथ्य की अनदेखी की है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति एनएस धनिक की युगलपीठ में हुई। अदालत ने मामले को सुनने के बाद देहरादून के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को निर्देश दिये कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के तीन सदस्यों का एक पैनल अभियुक्त की मेडिकल जांच करे और जांच रिपोर्ट 07 दिसंबर तक सील बंद लिफाफे में अदालत में पेश करें। इस मामले में सुनवाई 13 दिसंबर को होगी।