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वीडियो : 58 वर्षीय इंजीनियर ने अपने घर को बनाया अर्बन जंगल..1700 से ज्यादा पेड़-पौधे लगाए, पूरा घर एवरग्रीन लगता है...अमरीका से सीखा जहां तीन तिहाई प्रकृति है और एक तिहाई इंसान!

वीडियो : 58 वर्षीय इंजीनियर ने अपने घर को बनाया अर्बन जंगल..1700 से ज्यादा पेड़-पौधे लगाए, पूरा घर एवरग्रीन लगता है...अमरीका से सीखा जहां तीन तिहाई प्रकृति है और एक तिहाई इंसान!

बेंगलुरु के रहने वाले 58 वर्षीय इंजीनियर, नटराज उपाध्याय ने अपने घर में 1700 से ज्यादा पेड़-पौधे लगाकर ‘अर्बन जंगल’ बनाया है। जहाँ पर आपको पपीता, केला, इमली और मोरिंगा जैसे 300 से ज्यादा किस्म के पेड़-पौधे और 50 से ज्यादा किस्म के पक्षी, तितलियाँ और अन्य जीव-जंतु दिख जाएंगे।

अपने इस जंगल को उन्होंने ‘आश्रम गार्डन्स अर्बन एवरग्रीन जंगल’ नाम दिया है। ‘अर्बन’ इसलिए क्योंकि, यह जंगल बेंगलुरु शहर में है और ‘एवरग्रीन’ इसलिए क्योंकि, उनका यह जंगल हमेशा हरा-भरा और फलता-फूलता रहता है। यह अर्बन जंगल बेंगलुरु के रहने वाले, 58 वर्षीय नटराज उपाध्याय के घर में है।

मूल रूप से कर्नाटक के उडुपी के पास पारमपल्ली से संबंध रखने वाले, नटराज एक किसान के बेटे हैं। स्कूल की पढ़ाई तक, वह अपने पिता के साथ रहे और खेती में उनका हाथ बंटाते रहे। आगे उन्होंने इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री ली। सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में उन्होंने न सिर्फ भारत में बल्कि अमेरिका में भी 10 वर्ष तक काम किया। वह बताते हैं, “मैंने अपनी पत्नी की खराब तबियत के कारण, साल 2008 में नौकरी से रिटायरमेंट ले ली थी। मेरी पत्नी को मेरी जरूरत थी और तब तक मैंने इतना कमा लिया था कि हम अपनी जिंदगी आराम से गुजार सकें। इसलिए, मैंने अपने करियर से रिटायरमेंट ले ली और घर-परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने लगा।”

अपनी बागवानी की शुरुआत के बारे में नटराज कहते हैं, “हमारे घर के आँगन में जो खाली जगह है, वहाँ तो पहले भी पेड़-पौधे थे। लेकिन, छत पर बागवानी का ख्याल मुझे 2009-10 में आया। क्योंकि उन दिनों, गर्मियों में बेंगलुरु जैसे शहर में हमें कूलर की जरूरत महसूस होने लगी थी। इसलिए, मैंने सोचा कि क्यों न छत पर बागवानी की जाए ताकि घर के अंदर का तापमान थोड़ा कम हो जाये।”

शुरुआत में, उन्होंने चावल के खाली पैकेट का इस्तेमाल पेड़-पौधे लगाने के लिए किया। उन्होंने फल, फूल, सब्जियां तथा औषधीय पौधे लगाना शुरू किया। लेकिन कुछ सालों बाद, उन्हें लगा कि उन्हें अपने बगीचे को जंगल के रूप में विकसित करना चाहिए। आज उनका यह जंगल तीन हिस्सों में फैला हुआ है- उनकी छत (1500 वर्ग फीट), उनके घर का आंगन (400 वर्ग फीट) और उनके घर के बाहर की खाली जगह (200 वर्ग फीट)। छत पर उन्होंने पुराने 55 लीटर के ड्रमों का इस्तेमाल किया है।

वह कहते हैं, “मैंने छत के लिए अलग-अलग तरह की चीजें इस्तेमाल की जैसे- प्लास्टिक के पैकेट, ग्रो बैग आदि। लेकिन दो-तीन साल में ही ये जवाब देने लगते हैं। इसलिए, मैंने पुराने ड्रमों में पेड़ों को लगाया। आज मेरी छत पर 250 ड्रम हैं, जिनमें छोटे पौधों, झाड़ियों, बेलों से लेकर बड़े-बड़े पेड़ तक लगे हुए हैं। एक ही ड्रम में, अलग-अलग किस्म के कई पेड़-पौधे आपको मिल जाएंगे। मेरे जंगल में बहुत से नए-नए पौधे पनपते रहते हैं। मैं खुद हर महीने, अलग-अलग पौधे लगाता हूँ ताकि मेरा जंगल हमेशा हरा-भरा रहे।”

उनके इस जंगले में 70 से भी ज्यादा बड़े पेड़ हैं, जिनमें पपीता, केला, बांस, मलबरी, अंजीर, इमली, मोरिंगा, कोरल वाइन, और मेक्सिकन सूरजमुखी आदि शामिल हैं। इसके अलावा, उनके यहाँ कुछ मौसमी सब्जियां और औषधीय पौधे भी लगे हुए हैं। वह बताते हैं कि जैसे-जैसे जंगल घना होता गया, मौसमी सब्जियां उगाना कम हो गया। क्योंकि, सब्जियों को अच्छी धूप की जरूरत होती है लेकिन, बड़े पेड़ों की वजह से छत पर धूप कम आती है। इसलिए, अब वह ऐसे पौधे लगाने पर ध्यान देते हैं, जो छांव में भी अच्छे से पनपते हैं।

देखिए वीडियो : <bript>