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भिलाई की बादशाहत को चुनौती : छत्तीसगढ़ बास्केटबॉल संघ के चुनाव में उठ रहे विरोध के स्वर

भिलाई की बादशाहत को चुनौती : छत्तीसगढ़ बास्केटबॉल संघ के चुनाव में उठ रहे विरोध के स्वर

राजकुमार मल

भाटापारा- संविधान के नियमों का पालन नहीं। इसलिए यह चुनाव अवैध है। इन शब्दों ने छत्तीसगढ़ बास्केटबॉल संघ के चुनाव को सीधे-सीधे चुनौती दे दी है। यह शब्द, उस भिलाई के लिए भी संकेत है, जिसकी बादशाहत भी बीते 20 बरस से कायम है।

23 नवंबर को भिलाई में हुई छत्तीसगढ़ बास्केटबॉल संघ की वार्षिक साधारण सभा की बैठक की चर्चा प्रदेशभर में हो रही है। यह चर्चा इसलिए क्योंकि 16 जिलों से नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जायज है यह सवाल, कि 20 बरस से नेतृत्व संभाल रहे भिलाई को, और कितने दिन देखा जाना चाहिए ? चुनाव हुए लेकिन संघ के संविधान के परिपालन को लेकर जैसी मनमानी दिखाई गई, वह भी कई तरह के सवाल छोड़ गई। जिसके जवाब नहीं मिल रहे हैं।

क्या हुआ 23 की बैठक में

छत्तीसगढ़ बास्केटबॉल संघ की 23 नवंबर को भिलाई में हुई बैठक में पदाधिकारियों का चुनाव होना था। माहौल इस बरस, बदला- बदला सा था। गरियाबंद, महासमुंद, बस्तर, बलौदा बाजार, जांजगीर, सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर सहित 16 जिलों के बास्केटबॉल संघ नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा कर रहे थे। इस बीच भिलाई के राजीव जैन को अध्यक्ष और  अनीता पटेल को सचिव पद के लिए मनोनयन कर लिए जाने की घोषणा कर दी गई । कारण यह बताया गया कि इन दोनों पदों के लिए अन्य कोई नाम नहीं आए। मामला यहीं से बिगड़ा और विरोध के स्वर उठने लगे, लेकिन जवाब नहीं मिले।

प्राथमिकता भिलाई को ही क्यों ?

छत्तीसगढ़ बास्केटबॉल संघ में, जिस तरह 20 बरस से भिलाई की एकछत्र बादशाहत बनी हुई है, उसे लेकर प्रदेश के 16 जिलों के बास्केटबाल संघ ने सवाल किया है कि आखिरकार हर बरस भिलाई को ही क्यों नेतृत्व सौंपा जाता है ? क्या दूसरे जिलों को अवसर नहीं मिलना चाहिए ? जवाब नहीं मिलता देखकर, अब छोटे जिले एकजुट होने लगे हैं।

यह भी बड़ी वजह

प्रदेश के जिलों में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन  नई प्रतिभा की खोज में जैसी उदासीनता संघ दिखा रहा है, वह भी बड़ी वजह बन चुकी है। इसी तरह बास्केटबॉल मैदानों की बदहाली भी किसी से छिपी नहीं है। सरकार से मिलने वाली सहायता को लेकर भी संघ की चुप्पी ने विरोध को बढ़ाया ही है। इन सब परिस्थितियों ने भिलाई के नेतृत्व को सीधे-सीधे चुनौती दे दी है। अब देखना यह है कि आने वाले दिन कैसे होंगे ?