धमतरी कलेक्टर मौर्य की सफाई, 'लाकडाउन से जमाखोरी, कालाबाजारी की संभावना पैदा होती है, लोग पैनिक हो जाते हैं इसलिए लॉकडाउन का व्यक्तिगत रूप से विरोधी'

धमतरी कलेक्टर मौर्य की सफाई, 'लाकडाउन से जमाखोरी, कालाबाजारी की संभावना पैदा होती है, लोग पैनिक हो जाते हैं इसलिए लॉकडाउन का व्यक्तिगत रूप से विरोधी'


रायपुर. धमतरी कलेक्टर जे.पी. मौर्य ने लॉकडाउन पर दिए बयान पर अपनी सफाई पेश की है. खुद के द्वारा ली गई प्रेस कांफ्रेंस में कही बातों को उन्होंने निजी करार दिया है और एक लिखित बयान भी जारी किया.

आइएएस जे.पी. मौर्य ने कहा कि मेरे द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में यह नही कहा गया था कि कोरोना महामारी राजनांदगांव, बिलासपुर तथा रायपुर में लापरवाही के कारण फैली. मेरे द्वारा यह भी नही कहा गया कि लाकडाउन से जमाखोरी तथा कालाबाजारी का बोलबाला हो जाता है' बल्कि मैंने यह कहा था कि लाकडाउन से जमाखोरी, कालाबाजारी की संभावना पैदा होती है, लोग पैनिक हो जाते हैं'

असल में श्री मौर्य ने धमतरी में एक प्रेस कांफ्रेंस ली थी​ जिसमें उन्होंने कई संवाददाताओं से चर्चा की थी.इसमें दैनिक आज की जनधारा के संवाददाता भी पहुंचे थे. बताया जाता है कि यहीं पर श्री मौर्य ने लॉकडाउन को पैनिक करार दिया था और यही शब्द उन्होंने अपने खण्डन में भी कहे हैं.



अब सवाल उठता है कि यदि कलेक्टर ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और उसमें कोई बात कही तो यह व्यक्तिगत कैसे हो गई. मौर्य ने अपने खण्डन में भी कहा कि इस बार के लॉकडाउन का व्यक्तिगत रूप से विरोधी रहा हूं परंतु जनमत तथा लोगों की मांग के कारण नगरीय निकायों में कन्टेनमेंट क्षेत्र घोषित किया गया.

दैनिक आज की जनधारा वेब पोर्टल' की खबर का आंशिक खण्डन करते हुए यदि कलेक्टर लिखित रूप से स्वीकार कर रहे हैं कि लाकडाउन से जमाखोरी, कालाबाजारी की संभावना पैदा होती है, लोग पैनिक हो जाते हैं' तो क्या वे मान रहे हैं कि लॉकडाउन नही लगना चाहिए. और यदि ऐसा है तो क्या वे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री के नजरिए से या कह लें कि सरकारी आदेश से सहमत नही है कि कोरोना महामारी रोकने के लिए लॉकडाउन जरूरी है.