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जीते-जीते रक्तदान, जाते-जाते नेत्र एवं देहदान सूत्र वाक्य को सार्थक कर रहा रक्तदाता क्रांति समूह

जीते-जीते रक्तदान, जाते-जाते नेत्र एवं देहदान सूत्र वाक्य को सार्थक कर रहा रक्तदाता क्रांति समूह

राजू साहू , जांजगीर। समाज को एक नई दिशा देने के लिए किसी और से अपेक्षा करने से बेहतर है स्वयं आगे बढ़कर उस कार्य की शुरुआत करना  इसी भावनाओं को मन में धारण करके रक्तदान, नेत्रदान एवं देहदान के क्षेत्र में रक्तदाता क्रांति समूह के सदस्यों ने पहल की और लोग जुड़ते गए।वर्तमान समय में समाज में कई ऐसे सामाजिक संस्थाएं हैं जो एक जुनून की तरह दूसरों के लिए कार्य करते हैं जांजगीर जिले में भी एक ऐसा ही समूह रक्तदाता क्रांति समूह है, जिसका मुख्य उद्देश्य एवं प्राथमिकता लोगों की सेवा हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े इसके लिए कभी भी पीछे नहीं हटते।

रक्तदाता क्रांति समूह की शुरुआत महज  10 लोगों से जुलाई 2016 में हुई थी, समूह के कार्यकर्ताओ के निःस्वार्थ सेवा कार्य को देख लोग जुड़ते गए और कारवां बढ़ता गया वर्तमान में इस समूह में 250 से अधिक सदस्य जुड़े हैं, जिन्होंने 5000 से अधिक ब्लड डोनेट कर 7000 से अधिक गरीब वर्ग के सिकलिंग, थैलीसिमिया एवं गर्भवती जरूरतमंद मरीजों को ब्लड उपलब्ध कराया है। 

जब भी कोई बीमार होकर अस्पताल पहुंचता है और उसे ब्लड की आवश्यकता पडती है तो उसके परिजनों को भारी परेशानियो का सामना करना पड़ता है एवं मरीज के परिजनों को काफी भागदौड़ करनी पड़ती है इसी समस्या को ध्यान में रखकर बीते 12 जुलाई 2016 को मां दुर्गा मंदिर प्रांगण सिवनी में रक्तदाता क्रांति समूह का गठन किया गया इस समूह का एक ही उद्देश्य है मानव सेवा माधव सेवा एवं रक्तदान जीवनदान है। 

रक्तदाता क्रांति समूह के संरक्षक अशोक तिवारी ने बताया कि रक्तदाता क्रांति समूह के गठन की प्रेरणा समूह के प्रथम रक्तदाता सिवनी के कमलेश देवांगन से मिली जो लगभग 100 कि.मी. दूर जाकर राष्ट्रीय तलवार खिलाडी दिव्यांग सुनीता पात्रे को O पॉजिटिव रक्त देने चला गया। किसी जरूरतमंद मरीज को ब्लड की आवश्यकता होने की सूचना प्रसारित होती है तो ग्रुप के कोई ना कोई सदस्य सक्रिय हो जाते हैं और उस जरूरतमंद मरीज को ब्लड की व्यवस्था करने के जद्दोजहद में जुट जाते है।


नेत्रहीनों को रोशनी देने लिया नेत्रदान का संकल्प 

नेत्रदान करने के पीछे रक्तदाता क्रांति समूह की मंशा है की जो लोग दुनिया को नही देख पाते उनके लिए ये जिन्दगी दुश्वर है| ऐसे लोग दुनिया को देख पाए तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा उनके जीवन में मुस्कान बिखेरने का यह छोटा सा प्रयास किया जा रहा है, जिसमें महेश राठौर, अश्वनी यादव, हरि अग्रवाल, प्रियंका अग्रवाल, संतोष देवांगन, पवन यादव, दीपक यादव, दीनदयाल यादव, राम किशन साहू, शिवम राठौर एवं केशव श्रीवास ने नेत्रदान संकल्प पत्र भर चुके है।

मरणोपरांत देहदान का लिया संकल्प 

मेडिकल छात्रों को अध्ययन के लिए मृत शरीर की आवश्यकता पड़ती है मृत शरीर के कमी होने के कारण मेडिकल छात्रों का अध्ययन का कार्य प्रभावित होता है। इस समस्या को देखते हुए रक्तदाता क्रांति समूह के पहल पर महेश राठौर, सुंदर लाल कौशिक,  मलियज राम राठौर, हरि अग्रवाल, प्रियंका अग्रवाल आदि ने सिम्स मेडिकल कॉलेज बिलासपुर में जाकर मरणोपरांत देहदान का संकल्प पत्र भर चुके है।

गरीब वर्ग के लोगो का अस्थि विसर्जन करने में सहयोग 

रक्तदाता क्रांति समूह के संस्थापक सदस्य महेश राठौर एवं समूह के सदस्य जितेन्द्र यादव दिव्यांग हैं ये दोनों अति गरीब वर्ग के लोगों को अपने साथ प्रयागराज इलाहाबाद ले जाकर अस्थि विसर्जन करने में सहयोग कर रहे हैं। दोनों दिव्यांग होने के कारण इलाहाबाद जाने वालों को रेल किराया नाममात्र लगता है, क्योंकि रेलवे के नियमानुसार दिव्यांगों को रेल किराया निःशुल्क है। जबकि उसके साथ जाने वाले व्यक्ति को नाममात्र का किराया लगता है। ये दोनों अभी तक 130 से अधिक अति गरीब वर्ग के लोगो का अस्थि विसर्जन में सहयोग कर चुके है। 

रक्तदान के लिए मातृशक्ति भी नही है पीछे

21वीं सदी में मातृशक्ति भी प्रत्येक क्षेत्र में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है। वह चाहे रक्तदान के क्षेत्र ही क्यों ना हो, रक्तदाता क्रांति समूह की सदस्य उत्तरा साहू, चंद्रकली चौहान, दीप्ति तिवारी, पूर्णिमा चौहान, पल्लवी वेंकट, रश्मि वेंकट, राजकुमारी देवांगन आदि मातृशक्ति इस समूह से जुड़कर जरूरतमंदों के लिए समय अनुसार रक्तदान कर रही है। 

इन लोगो ने दी अपने काम से ज्यादा सेवा को प्राथमिकता 

साई मंदिर लक्षनपुर चौक में चाय की दुकान लगाने वाले रामकिशन साहू 20 बार, प्रेम ऑटो सेंटर चाम्पा में कार्यरत नरेंद्र साहू 21 बार, ग्राम सिवनी के हॉटल व्यवसायी मनीष राठौर 16 बार,  हटरी बाजार चाम्पा में सब्जी की दुकान लगाने वाले रितेश कसार 10 बार,  पंकज कसार 15 बार,  राजेश कसार 12 बार, दुर्ग में कार्यरत कोसमन्दा निवासी छत्रधर राठौर 20 बार से अधिक,  समाज सेवी कोसमन्दा निवासी भुनेश्वर राठौर,  बिलासपुर के लकेश्वर साहू 40 बार, रेलवे पुलिस बिलासपुर में पदस्थ संतोष राठौर 25 से अधिक बार, जिला हाथकरघा कार्यलय में कार्यरत महेश राठौर 43 बार एवं इसी कार्यालय में कार्यरत दीपक कश्यप 12 बार, ऑनलाइन ग्राफिक्स में कार्यरत चंद्रशेखर देवांगन, सालिक फेब्रिकेशन के संचालक देवेश विश्वकर्मा 10 बार, केडिया इलेक्ट्रॉनिक्स के संचालक रिंकू अग्रवाल 13 बार, पुलिस विभाग में पदस्थ नंदकिशोर राठौर, केशव देवांगन एवं ईश्वरी राठौर एवं रक्तदाता क्रांति समूह के सभी सदस्यों ने अपने काम को छोड़कर रक्तदान एवं सेवा को अधिक महत्व दिया है।

सिकलिंग एवं थैलीसीमिया के मरीजों को लिया गोद

जब किसी को रक्त की आवश्यकता पड़ती है तब सामान्यतः हम परेशान हो जाते हैं अब जरा सोचिए अगर आपको किसी अपने के लिए हर 15 दिनों में या हर महीने रक्त की आवश्यकता पड़ती हो तो वह किस प्रकार की विषम समस्याओं से गुजरते होंगे, ठीक इसी प्रकार सिकलिंग एवं थैलेसीमिया के मरीजों को हर माह रक्त की आवश्यकता पड़ती है तो उनके परिजनों की मानसिक परेशानियां आप स्वतः ही समझ सकते हैं।

डॉ संतोष यादव के पहल पर रक्तदाता क्रांति समूह परिवार के द्वारा 15 सिकलिंग एवं  थैलेसीमिया के मरीजों को गोद लेकर निरंतर रक्त  की आपूर्ति कराई जा रही है, इस समूह के सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि हमने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि हमारा छोटा सा यह प्रयास इतने कम समय में अपनी सार्थकता सिद्ध करेगा।