मी़डिया की जीजिविषा

मी़डिया की जीजिविषा

आचार्य रंजन मोड़क 

कोरोना के कारण पहली बार ऐसा हो रहा है जब हर कोई घरों में कैद हो गया है परन्तु कुछ ऐसे भी हैं जिनको ज़िंदगी सलाम करती है। लोग कुछ भी कहें ये अपने काम को पूरे जुनून से अंजाम देने में लगे हुए हैं ये चाहें तो ये भी इस लॉक डाउन में अपने-अपने घरों में आराम से बैठ सकते हैं पर इन्होंने स्वयं को चुना है मानवता की सेवा के लिए। इसमें भी वही दो प्रकार के लोग हैं एक वो जो दिखावे के लिए करने वाले और दूसरे सत्यनिष्ठा से जन सेवा करने वाले। दुनिया बनाने वाले ने सॉफ्टवेयर ही ऐसा बनाया है जिसमें ये दो का आंकड़ा हमारे साथ हमेंशा रहेगा इसे चाहकर भी हम अपनी हार्डडिस्क से अलग नहीं कर सकते जैसे अच्छा-बुरा, सुख-दुःख, हँसना-रोना और स्त्री-पुरुष। समझें तो इनके बिना जीवन की कल्पना भी नामुमकिन है। 

हर - पल बढ़ते इस संकट के दौर में मीडिया मित्र लगे हुए हैं पल-पल की दुनिया जहान की ख़बरें हम तक येनकेन प्रकारेण पहुँच जाए और हम सावधान रहें, सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें। पर सवाल ये है कि 

1.जब हम अपने घरों में आराम से सुरक्षित अपने परिवार के साथ बैठे हैं तो ये मीडिया साथी क्यों नहीं? 

2.क्या इनका परिवार नहीं है? 

3.क्या इन्हें अपनी जान का डर नहीं है? 

4. क्या इन्हें महिने का वेतन नहीं मिलेगा यदि ये काम पर नहीं जाएंगे? 

5. क्या इन्हें अपने परिवार का मोह नहीं? 

6. क्या ईश्वर ने इन्हें कोई विशेष अमृत पिला कर इस सृष्टि में भेजा कि जाओ अब तुम सब घर-परिवार के होते हुए भी बेघर बेपरिवार ही रहोगे और समाज के लिए ही अपना समय दोगे? 

7.क्या अब भी यही कहेंगे मीडिया तो बिकी हुई है? या मीडिया तो राजनेताओं और बड़े रसूदखोरों के हाथों की कठपुतली ही होती है? 

ऐसे तमाम प्रश्नों के उत्तर न जाने कितने ही तरीकों से ढूंढने के प्रयासों में कितने ही तथाकथित विद्वानों ने अपना समय नष्ट किया है। पर आज हमारे इन साथियों के विषय में न तो कोई कुछ अच्छा सन्देश बना रहा है, न कोई कहानी लिख रहा है, न कोई उनकी प्रशंसा में कुछ कह रहा है, फिर भी बिना किसी लाभ की आशा के ये मीडिया साथी अपना काम किए जा रहे हैं। 

समाचार पत्र आज की जनधारा के माध्यम से मैं सम्पूर्ण विश्व की ओर से हमारे सभी मीडिया साथियों को शुभकामना या आभार कहकर  उनकी कर्तव्यनिष्ठा को  छोटा नहीं करूँगा अपितु मीडिया साथियों की कर्तव्यनिष्ठा को शत-शत नमन और वंदन करता हूं.....

(रंगसाधक, महाराष्ट्र मण्डल, रायपुर, छत्तीसगढ़)