कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः बेख़बर बनाती ख़बरें

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः बेख़बर बनाती ख़बरें


हिंसा की ख़बरें

प्रचार हैं हिंसा का

जो प्रेरित करती हैं ...

आप भी करके देखें हिंसा


राजनीति की ख़बरें

प्रचार हैं भ्रष्ट राज्य-व्यवस्था का

जो प्रेरित करती हैं ...

आप भी मजे मारें भ्रष्ट होकर


बाज़ार की ख़बरें

प्रचार हैं मनमानी लूट का

जो प्रेरित करती हैं ...

आप भी लूट सकें तो लूटें


धर्म की ख़बरें

प्रचार हैं उस जड़ता का

जो प्रेरित करती हैं...

आप अपने आपको भूलकर जीते रहें


अखबार के किसी कोने में

जगह पा गयी भलाई की ख़बर

संदेह से भरती है ...

अरे, यह अभी बची रह गयी है!


कोई ख़बर अब ख़बरदार नहीं करती

बेख़बर बनाती है