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वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटेरिया नहीं रहे, आईआईएमसी के महानिदेशक ने जताया दुख कहा- जनमुद्दों के लिए जूझते रहे पटेरिया

वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटेरिया नहीं रहे, आईआईएमसी के महानिदेशक ने जताया दुख कहा- जनमुद्दों के लिए जूझते रहे पटेरिया

नई दिल्ली/इंदौर12 मई। वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और लेखक श्री शिवअनुराग पटेरिया का बुधवार सुबह इंदौर में निधन हो गया है। श्री पटेरया कोरोना से ग्रस्त होकर इंदौर के बाम्बे हास्पिटल में इलाज करा रहा थे। उनका आक्सीजन लेवल बहुत कम हो गया था। इस बीच दिल का दौरा पड़ने से आज सुबह आखिरी सांसें लीं। भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने श्री पटेरिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है, उन्होंने कहा कि उनका निधन पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

    प्रो. द्विवेदी ने कहा कि श्री पटैरया जनमुद्दों के लिए जूझने वाले पत्रकार थे। उन्होंने छतरपुर से आंचलिक पत्रकार के तौर पर 1978 में पत्रकारिता प्रारंभ कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के संदर्भों पर लिखीं उनकी पुस्तकें बेहद मूल्यवान कृतियां हैं। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि उनका जाना तमाम युवा पत्रकारों, पत्रकारिता जगत के लिए एक शून्य रच रहा है, जिसे भर पाना कठिन है। उन्होंने कहा कि पटेरिया ने अपनी पूरी जिंदगी पत्रकारिता, लेखन और सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित कर दी। अन्याय के विरुद्ध लड़ते हुए वे पत्रकारिता में आए और अपनी धार बनाए रखी। वे स्वभाव से मृदुभाषी थे, किंतु अपनी पत्रकारिता में उन्हें जो लिखना और कहना होता था वही करते थे।

     श्री द्विवेदी ने बताया कि व्यवस्था के खिलाफ बंदूक, मध्यप्रदेश की पत्रकारिता, बिन पानी सब सून, पत्रकारिता के युग निर्माता राजेंद्र माथुर, मध्यप्रदेश संदर्भ, छत्तीसगढ़ संदर्भ, मप्र की जल निधियां, मप्र की गौरवशाली जल परंपरा जैसी अनेक कृतियों के वे लेखक थे। उन्हें राजेंद्र माथुर सम्मान,मेदिनी पुरस्कार,डा.शंकरदयाल शर्मा अवार्ड जैसे सम्मानों से अलंकृत किया गया था। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि श्री पटेरिया न सिर्फ पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में बल्कि मध्यप्रदेश के सार्वजनिक जीवन में भी सार्थक हस्तक्षेप रखते थे। उनके मार्गदर्शन में पत्रकारों की एक लंबी पूरी पीढ़ी तैयार हुई।