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चावल घोटाले के मामले में ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आधा दर्जन से अधिक तत्कालीन अधिकारियों और अन्य के खिलाफ एफआईआर

चावल घोटाले के मामले में  ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आधा दर्जन से अधिक तत्कालीन अधिकारियों और अन्य के खिलाफ एफआईआर

भोपाल।  मध्यप्रदेश के बालाघाट और मंडला जिले से जुड़े चावल घोटाले के मामले में प्रारंभिक जांच के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने आज आधा दर्जन से अधिक तत्कालीन अधिकारियों और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली।

ईओडब्ल्यू सूत्रों के अनुसार मंडला और बालाघाट जिले में इस वर्ष की शुरुआत में राज्य शासन ने प्राथमिक विपणन और सहकारी समितियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी किसानों से की थी। इस धान को कस्टम मिलिंग के लिए जिले में पंजीकृत चावल मिलों को दिया गया। संबंधित राइस मिलों ने इस धान को मिलिंग के बाद मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के माध्यम से पंजीकृत गोदामों में जमा किया। इन गोदामों का निरीक्षण भी केंद्रीय समिति ने किया।

निरीक्षण के दौरान केंद्रीय समिति द्वारा चावल के सैंपल लेकर उनकी जांच करायी गयी। इस जांच में पता चला कि मिलर्स द्वारा गोदामों में जमा कराए गए चावल अपमिश्रित (मिलावटी) और निम्न गुणवत्ता के थे। चावल रखने वाले वारदाने भी दो से तीन वर्ष पुराने थे। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर जांच में यह तथ्य भी सामने आए कि मिलर्स द्वारा अपनी क्षमता से अधिक धान प्राप्त की गयी है और अपने नाम पर धान लेकर अन्य मील से कस्टम मिलिंग करायी गयी।

जांच में यह भी पता चला कि कस्टम मिलिंग के दाैरान मिलर्स द्वारा अन्य प्रदेशों से भी धान और चावल प्राप्त कर मिलिंग की गयी है। वहीं कस्टम मिलिंग का धान जमा करते समय गुणवत्ता निरीक्षकों ने भी गुणवत्ता की ठीक से जांच नहीं की और चावल को गोदामों में जमा कराया गया। जमा किए गए चावल की जांच नियम अनुसार जिला प्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रबंधक की ओर से भी नहीं की गयी।

इस तरह जांच में साफ हुआ कि मंडला और बालाघाट जिले के मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के अधिकारियों एवं मिलिंग से संबंधित व्यक्तियों के द्वारा अापराधिक षड़यंत्र रचकर शासन को जमा किए जाने वाले चावल के स्थान पर अपमिश्रित (मिलावटी) एवं निम्न मानक गुणवत्ता का चावल जमा किया गया। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने आज संबंधित आधा दर्जन से अधिक आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

इस मामले में बालाघाट में पदस्थ मध्यप्रदेश सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के तत्कालीन प्रबंधक आर के सोनी के अलावा तत्कालीन गुणवत्ता निरीक्षकों मुकेश कनोरिया, नागेश उपाध्याय, एस एस द्विवेदी, राकेश सेन और लोचन सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है। इसके अलावा मंडला में पदस्थ कार्पोरेशन के तत्कालीन प्रभारी जिला प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव और गुणवत्ता निरीक्षक संदीप मिश्रा के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गयी है। अब इस मामले की आगे की जांच की जाएगी और अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

कुछ माह पहले चावल घोटाले को लेकर विपक्ष के सदस्यों ने काफी हंगामा किया था। इसके बाद सरकार ने जांच का कार्य ईओडब्ल्यू को सौंपा था।