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इंसानियत के भाव जगाने के लिये प्रयत्नशील है श्रीमद् भागवत कथा

इंसानियत के भाव जगाने के लिये प्रयत्नशील है श्रीमद् भागवत कथा


सक्ती।   भागवत कथा को सामाजिक उत्थान व जागरण माध्यम मानकर भागवत प्रवाह के माध्यम से समाज में इंसानियत के भाव जगाने के लिये प्रयत्नशील है। 

 यह उद्गार भागवत प्रवाह के संरक्षक अधिवक्ता चितरंजय सिंह पटेल ने श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर  व्यक्त किया । आज कथा के  सप्तम दिवस पर भागवत प्रवाह आध्यात्मिक सेवा संस्थान छ0ग0 के संरक्षक चितरंजय सिंह के साथ युवा संयोजक भुरू अग्रवाल, ने कथा रसपान किया। 

ग्राम सुलौनी के पावन धरा पर यजमान के रूप युवा समिति के द्वारा डॉ राजेश के अगुवाई में सामुहिक रूप सर्व कामना पूर्ति हेतु ग्राम में प्रथम बार आयोजित भागवत कथा में व्यास पीठ पर पंडित राजेन्द्र महाराज के साथ आचार्य देवकृष्ण के मधुर भजनों व संतोष महंत व साथियों के संगीतमय प्रस्तुति व भक्तिमय वातावरण में आज भगवान श्रीकृष्ण उद्धव संवाद की कथा संपन्न हुई।

व्यास पीठ से सत्संग की महिमा को बताते हुए आचार्य राजेंद्र महाराज ने कहा कि सत्संग से ही भगवत प्राप्ति होती है तथा कलियुग में भागवत कथा श्रवण से ही मोक्ष प्राप्ति संभव है।

आचार्य देवकृष्ण ने बताया कि भागवत प्रवाह आध्यात्मिक सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ के सान्निध्य में अनवरत भागवत कथा का अविरल प्रवाह के साथ सामाजिक सरोकार के कार्य भी अनवरत जारी है। साथ ही तुर्री धाम में शीघ्र ही भव्य बांके बिहारी मंदिर के निर्माण भी शीघ्र ही प्रारंभ होने जा रहा है तथा महामारी के दरम्यान काल कलवित स्मृति शेष मृतात्माओं के मोक्षार्थ अकिंचन भागवत कथा का आयोजन भी भागवत प्रवाह के द्वारा प्रस्तावित है।