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जनकपुर कोविड सेंटर में गई एक जान,परिजन और स्वयं स्वास्थ्य कर्मियों ने लगाया प्रबंधन पर आरोप....

जनकपुर कोविड सेंटर में गई एक जान,परिजन और स्वयं स्वास्थ्य कर्मियों ने लगाया प्रबंधन पर आरोप....


जनकपुर, 8 मई. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारा देश इस समय वैश्विक महामारी कोरोना से जूझ रहा है। और महामारी की गंभीरता को देखते हुए कोरिया जिला के क्षेत्रीय विधायक गुलाब कमरों के द्वारा 10 बिस्तरी कोविड अस्पताल मैट्रिक छात्रावास को बनाया गया है। जिससे उनके क्षेत्र के लोगों को दिक्कत ना हो और ने तत्काल उपचार यही मिल सके।

बीती रात जनकपुर कोविड अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है जहां परिजनों और स्वयं स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं कि कोविड अस्पताल में मरीजों का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वही उपचार के कमी के कारण बीती रात त्रिपाठी सर का देहांत हो गया।

वही परिवार के लोगों ने बताया कि 7 मई को शाम करीब 6:30 बजे त्रिपाठी जी अपने खटिया से गिर गए थे, जिसके बाद त्रिपाठी सर के परिजनों ने स्वास्थ विभाग को जानकारी दी, जिसमें स्वयं रामायण द्विवेदी जोकि जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही प्रभारी बी के पद में पदस्थ हैं। वे अपने दो सहयोगियों के साथ अपने घर से त्रिपाठी जी को लेकर जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। जहां उनका कोविड का जांच भी करवाया गया। और मृतक त्रिपाठी जी की कॉविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिसके लिए जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टर इंद्रेश ने इंजेक्शन और दवाई बताया जिससे मृतक के परिवार वालों ने जनकपुर के संदीप मेडिकल स्टोर से दवाई खरीदा और वह डायरेक्ट लेकर चले गए भरतपुर कोविड सेंटर में। जिसके बाद परिजन द्वारा बताया जा रहा है कि कोई सेंटर में पहुंचने के बाद कोविड-19 का कोई भी डॉक्टर स्वीपर या नर्स ने पीड़ितों की मदद नहीं की इतना तक कि उन्हें एंबुलेंस से उतारकर बेड तक भी नहीं पहुंचाया गया। जिसके बाद रामायण द्विवेदी के साथ दो और स्वास्थ्य कर्मियों ने मिलकर पेसेंट को उतारकर कोई सेंटर के अंदर ले गए। और हाथ जोड़कर विनती करते रह गए कि नहीं इंजेक्शन या प्राथमिक ट्रीटमेंट दिया जाए मगर किसी प्रकार का कोई ट्रीटमेंट ना देने के कारण पीड़ित की कोई अस्पताल में ही मृत्यु हो गई। अब यहां पर सब समझा जा सकता है कि जब स्वास्थ्य कर्मी के स्वयं के परिवार का ही है हाल है कि कोई गोविंद सेंटर में उनका इलाज करने के लिए तैयार नहीं हुआ। तो आम जनता के साथ क्या होता होगा आखिर जवाबदार कौन होगा।

इस मामले में जब जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ से पूछा गया तो उन्होंने सभी बातों को नकारते हुए कहा कि हमारे तरफ से किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं हुई है। तो प्रश्न-चिन्ह यह उठता है कि आखिर एक से डेढ़ घंटे बीत जाने के बावजूद भी पेसेंट को इंजेक्शन क्यों नहीं लगाया गया जबकि डॉक्टर इंद्रेश द्वारा दवाई कंप्लीट करके परिजनों को दी गई थी।