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फर्जी जाति प्रमाण पत्र के अधार पर बना सरपंच, चुनाव आयोग से शिकायत

फर्जी जाति प्रमाण पत्र के अधार पर बना सरपंच, चुनाव आयोग से शिकायत

बरबसपुर सरपंच फर्जी जाति पर लड़ा चुनाव और अब अपने ही पंचायत के लोगों को कर रहे परेशान शिकायत चुनाव आयोग को।
सरपंच के खिलाफ थाने सहित संबंधित विभाग को भी शिकायत।
वर्तमान सरपंच पर आरोप सोनी जाति के होते हुए अ.ज.जा. आधार पर सरपंच पद पर कब्जा।
ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद कार्यवाही ना होने से मायूसी, प्रशासन के प्रति विश्वास हो रहा कम।


बैकुण्ठपुर । कोरिया जिले के़ विकासखंड मनेन्द्रगढ में ग्राम पंचायत बरबसपुर का एक ऐसा मामला सामने आया है जहां वहां के नवनिर्वाचित सरपंच पर ही ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान सरपंच फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरपंच पद का उम्मीदवारी की और वत जीतकर ग्राम पंचायत बरबसपुर का सरपंच भी बन गया। जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने चुनाव आयोग भी की है। ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुये कहा कि जो व्यक्ति निर्वाचित होकर सरपंच बना है वह पिछड़ा वर्ग से आता है और उसने फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर आरक्षण का लाभ लेते हुये सरपंच पद की उम्मीदवारी की, उसने फर्जी जाति के आधार उसने पंचायत चुनाव लड़कर सरपंच बना बनने के बाद ही अपने गांव के लोगों को ही अनावश्यक परेशान कर रहा है। इस बात की शिकायत थाना सहित निर्वाचन आयोग को की गई है पर कार्यवाही ना होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सरपंच पर राजनीतिक रसुखदारों का संरक्षण प्राप्त होने से अधिकारी दबाव में है और लगातार कई शिकायतों के बाद भी सरपंच बचता जा रहा है।
कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बरबसपुर आता है और यह पंचायत मनेन्द्रगढ़ से लगा होने के कारण इसकी महत्व और बढ़ जाती है। यह पंचायत अपने उत्तकृष्ठ कार्यों से इसे आदर्श ग्राम पंचायत का दर्जा भी मिल चुका है। जिस ग्राम पंचायत की विकास को लेकर अपनी अलग और उम्दा पहचान थी। वहीं ग्रामीणों के अनुसार अब यह पंचायत की व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। वर्तमान में पूरा देष कोरोना वैश्विक महामारी से त्रस्त है और सरकारी संसाधनों का अभाव है ठीक उसी तर्ज में इस ग्राम पंचायत की भी स्थिति यही बनकर रह गई है कि यह पंचायत बिमारू और व्याप्त लचर व्यवस्था सहित सरपंय के तानाशाही रवैये का षिकार हो गया है। हर हद को लांघता, बरबसपुर का फर्जी सरपंच लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है।
यह है सरपंच की हकीकत - दर्रीटोला रेल्वे स्टेशन में पदस्थ रेल्वे कर्मचारी व निवासरत एसएस नारायण जिनकी जाति सोनी थी व उनके समस्त दस्तावेजों में उल्लेखित सोनी जाति का विवरण जो आज भी जगजाहिर है। जिनके एक मात्र पुत्र एस सावन कुमार हैं जिनकी बरबसपुर ग्राम के कोड्डी पारा के प्राथमिक स्कूल में 1985 में पहली कक्षा में दाखिला हुआ था जो उस शाला में पहली कक्षा की 1 वर्ष के पढ़ाई बाद ये कहकर छोड़ दिया गया दिया था कि स्कूल दूर है लेकिन फिर से दूसरे सत्र में उसी स्कूल में इनकी पढ़ाई शुरू करा दी गई थी। सरपंच सावन कुमार की जाति सोनी है जो पिछड़ा वर्ग में आता है प्राथमिक शाला व माध्यमिक शाला के दाखिल खारिज पंजी समेत अन्य दस्तावेजों में आज भी इनकी जाति अंकित है। सरपंच सावन कुमार के पिता एसएस नारायणा जिनके मृत्योपरांत उनकी पत्नी विमला यादव को सभी प्रकार की राशि प्राप्त हुई थी। और बिमला यादव की मृत्यु के बाद पुत्र के रूप में नॉमिनी होने से एस सावन कुमार को राशि प्राप्त हुई थी। एसएस नारायणा और बिमला यादव की मृत्यु उपरांत एस सावन कुमार द्वारा अपने आपको गोंड जाति और अपने पिता का नाम बदलकर प्यारेलाल बताया जाने लगा। एस सावन कुमार द्वारा अपना गोंड जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया है तथा आधार कार्ड में भी पिता का नाम एवम् जाति परिवर्तित करा दी गई है। एस सावन कुमार द्वारा कूट रचित तरीके से 5 वर्ष पूर्व मैन्युअल प्रक्रिया के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी करवाया गया था जो मात्र 06 माह के लिये ही वैध रहा था इसके बाद उसके पास अपनी जाति को प्रमाणित करने के लिये न कोई दस्तावेज है और न ही लोक सेवा केंद्र से कोई जाति सम्बंधित प्रमाण पत्र जारी करवाया गया है। जबकि किसी भी आदिवासी समुदाय को जाति प्रमाण पत्र हेतु 1944-45 का भूमि मिसल रिकार्ड और प्रारंभिक शिक्षा के प्रमाण पत्र आवश्यक दस्तावेज होते हैं। एस सावन कुमार द्वारा 2 वर्ष पूर्व में संपन्न पंचायत चुनाव में कूट रचित जीत भी दर्ज की गई है। जो छठी अनुसूची की घोर अवहेलना तो है ही साथ ही उक्त फर्जी युवक द्वारा वर्तमान में बरबसपुर सरपंच पद पर बनकर पंचायती राज व्यवस्था को भी बाधित करने का घोर कृत्य किया जा रहा है। दूषित कार्यशैली और उग्र प्रवृति का यह सरपंच अपनी तानाशाही से पूरे पंचायत क्षेत्र के लोगों में भय का माहौल बना रखा है नतीजा,इसका लगातार पद पर बने रहना समूचे ग्राम पंचायत के लिए बड़ा शोषण का कारण बनता जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार  एस सावन कुमार  अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पद पर गलत जानकारी देकर चुनाव निर्वाचित हुआ है जो पंचायत राज अधिनियम की धारा 36 के तहत नियम विरुद्ध है।
सरपंच किसी के भी घर में घुस जाता है आधी रात - शासकीय भूमि पर निस्तारी रास्ता निकालने पर सारथी महिला की बेटी और परिवार पर आधी रात घर में घुस कर छींना झपटी और गाली- गलौज की बात हो या फिर चोरी की अनसुलझी बात पर अनुसूचित जनजाति के युवक पर निराधार आरोप लगा कर डंडे से पीटने की बात हो। हर जगह अपनी सरपंची का धाौस जमाये बैठा सरपंच ग्रामीणों में दहषत का माहौल कर दिया है। उक्त सरपंच का आतंक इतने के बाद भी समाप्त नहीं होता तो लॉक डाउन में भी बीच मार्केट में तथाकथित ठिकाने में मांस मदिरा की पार्टी कर रात भर मोहल्ले में उत्पात मचाता है साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के दो युवकों के साथ कहीं भी किसी जगह उत्पात करता है और धमकी देता है कि अगर ऊंचा बोलोगे तो एट्रोसिटी एक्ट में जेल डलवा दूंगा। बरबसपुर का यह फर्जी सरपंच की इस दहषतगर्दी से ग्राम पंचायत क्षेत्र के ज्यादातर लोग इसकी वाहियात हरकत को झेलने के लिए विवश है। सरपंच सहित उसके आवारा साथियों की गाली गलौज को बर्दास्त करते हैं।
सरपंच के फर्जी दस्तावेज की हो चुकी है कलेक्टर से शिकायत - ऐसा नहीं है कि बरबसपुर के इस सरपंच के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निर्वाचित होने की शिकायत नहीं की गई है बल्कि बरबसपुर के तीन युवकों द्वारा कलेक्टर कोरिया को विधिवत शपथ पत्र में आवेदन देकर जांच की मांग की गई थी। वह जांच पूर्व अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मनेंद्रगढ़ को जांच के लिए दी भी गई थी और आज भी वह जांच तहसीलदार मनेंद्रगढ़ के समक्ष लंबित है पर न जाने क्यों जिला कलेक्टर सहित ब्लॉक स्तर के ये अधिकारी इस सरपंच पर इतने मेहरबान हैं कि जांच के नाम पर इनको सांप सूंघ जाता है। हालांकि बरबसपुर के इस सरपंच की तानाशाही रवैए को लेकर अब ग्राम के लोगों ने चुप्पी तोड दी है और थानों में शिकायत का सिलसिला शुरू हो चुका है।
विप्लव श्रीवास्तव तहसीलदार मनेंद्रगढ़ - इसकी षिकायत तो है और काफी पहले जांच के लिए मुझे कहा गया था पर अभी फिर से फाइल इधर उधर हो चुकी है जल्द ही इस मामले की जांच की जायेगी।