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ग्लोबल प्रेस ने भारत की दूसरी लहर से निपटने में विफलता के लिए मोदी को दोषी ठहराया

ग्लोबल प्रेस ने भारत की दूसरी लहर से निपटने में विफलता के लिए मोदी को दोषी ठहराया


पूरे भारत में अस्पताल अभिभूत हैं। न तो मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड उपलब्ध हैं, न ही श्मशान या कब्रिस्तान में जगह उपलब्ध है। भर्ती होने के लिए मरीजों और निकायों की लंबी कतार लगी रही। मृतकों के निपटान के लिए दवाओं, ऑक्सीजन, स्वास्थ्य सेवा कर्मियों और संसाधनों की भारी कमी है। पूरी दुनिया में प्रधान मंत्री मोदी के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और भारत को ऐसी दयनीय स्थिति में चलाने के लिए आलोचना की जा रही है। वास्तविक डेटा को कथित तौर पर एक ओर संक्रमण और मौतों की गलत गिनती से दबा दिया गया था और परीक्षण के प्रयासों को मध्य सितंबर 2020 के चरम के बाद काफी कम कर दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप नए मामलों का पता लगाने में गिरावट आई। इस झूठे आंकड़ों के आधार पर, पीएम पहली लहर के दौरान कोरोना लड़ाई जीतने पर अड़ गए। इसने लोगों को यह व्यवहार करने के लिए गुमराह किया कि वे खतरे से बाहर हैं,जिससे लोग फिर से बाजार या सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ लगा रहे हैं और बड़ी संख्या में एकत्रित हो रहे हैं।

मोदी सरकार द्वारा महामारी के प्रकोप के बाद से उठाए गए कदमों का अब दुनिया भर में विश्लेषण किया जा रहा है, कोविड प्रबंधन के बारे में अपने दोषों को मानते हुए। पीएम मोदी ने दुनिया के वैक्सीन हब और फार्मेसी बनने के लिए उनके नेतृत्व में भारत की प्रशंसा की थी, और कई विकसित देश भारत का समर्थन और प्रोत्साहन करते रहे थे, लेकिन अब जर्मनी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह शायद उनकी गलती थी।

फॉरेन प्रेस के मुताबिक कोरोना की पहली लहर में सबसे कड़ा नेशन वाइ़ड लॉकडाउन लगाकर मोदी ने वायरस को काफी हद तक रोक दिया था। अलबत्ता दूसरी लहर ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा।The Guardian ने अपनी मेन स्टोरी में जो फोटो लगाया है उसमें शमशान में जल रही चिता की ऊंची लपटों को दिखाया गया है। इसकी हेडिंग है-“The system has collapsed: India’s descent into Covid hell,”।

The Times, London ने भी मोदी पर जोरदार हमला किया है। अखबार की हेडलाइन है- दूसरी सुनामी में फंसे मोदी। अखबार ने भारत सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए लिखा- रोजाना तीन लाख से ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। सरकार ने हालात की गंभीरता को नजरंदाज किया। जिसके चलते इतनी बड़ी समस्या खड़ी हुई। ये वाकई बेहद गंभीर हालात हैं।

The Times लिखता है- दूसरी लहर की रफ्तार ने सरकार को कमज़ोर साबित कर दिया है। । आज भारत के लोग बेहद गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। देश औंधे मुंह गिर चुका है। अखबार ने बंगाल रैली को लेकर मोदी पर निशाना साधा। रैलियों में मास्क के बगैर लोग थे, लेकिन पीएम कह रहे थे-"सभी दिशाओं में, मुझे लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है ... मैंने ऐसा कभी नहीं देखा है।"

The Wall Street Journal लिखता है कि भारत का खतरनाक वायरस सीमा पार करके तबाही मचा सकता है। इसकी रिपोर्ट कहती है कि सरकार की नाकामी से हालात बिगड़े। दिल्ली ने अपनी पीठ थपथपा कर वायरस को मात देने की बात कही। ये सरासर गलत रवैया था। The New York Times ने भी मोदी को खलनायक बताया। नासिक की घटना का जिक्र कर अखबार ने लिखा- मीडिया ने पहली लहर में मोदी का महिमामंडन किया। अब वैश्विक स्तर पर बन चुकी धारणा को गलत साबित करने के लिए पीआर एजेंसीज को खासी मेहनत करनी होगी।