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नाकाबपोशों ने नाबालिक को अगवा कर जिंदा जलाने का प्रयास किया, माँ को पुलिस ने बैरंग लौटाया

नाकाबपोशों ने नाबालिक को अगवा कर जिंदा जलाने का प्रयास किया, माँ को पुलिस ने बैरंग लौटाया


पैसे के अभाव में अधजले बच्चे को रखी घर में, कहा पैसे मिलेंगे तो अच्छे अस्पताल में कराउंगी इलाज

चंद्र प्रकाश साहू

सुरजपुर, 12 फरवरी। जिला मुख्यालय में एक फिल्मी स्टाइल में एक कुछ नकाबपोश द्वारा एक नाबालिक किशोर को अगवा करके चाकू से गोदते है। जिसके बाद भी मन नहीं भरता है तो किशोर को जिंदा जलाने का प्रयास किया जाता है। जिसके उपरांत एक नए नम्बर नामबलिक बच्चे के माँ को फोन करके बच्चे को घर ले जाने की सूचना दी जाती है। महिला जिसकी शिकायत थाना में करने के बाद भी पुलिस द्वारा बगैर शिकायक्त लिए बहाना करके बैरंग ही घर भगा दे देती है। माँ अधमरे दर्द से तड़पते बच्चे को लेकर जिला अस्पताल गई जहां से अम्बिकापुर अस्पताल रैफर कर दिया गया है। नाबालिक की हालत स्थिर बताई जा रही है। 


दरअसल मामला जनवरी माह का है। सुरजपुर नगर पालिका के वार्ड भगत सिंह वार्ड में किराए के मकान में रहने वाली लैला खातून की है। बताती है कि प्रत्यागिता महिला है। इसका ब्याह देवनगर के ग्रामीण तिलकधारी से हुई थी। पति के छोड़ने के बाद कुछ वर्षों से नगर पालिका भगत सिंह वार्ड में किराया के मकान में रह कर जीवन यापन कर रही है। लैला खातून दो बच्चे है। एक लड़की की शादी कही और कर दी है। तो वहीं एक मासूम नाबालिक बच्चे के सहारे बुढापा की लाठी की उम्मीद बनाए रेजा कुली का कार्य करके जीवन यापन कर रही थी। एक पुत्र है जो माँ के साथ रहता है जिसका नाम छोटू सिंह है। उम्र आधार कार्ड के मुताबिक 16 वर्ष है। ये नाबालिक अपने घर का खर्च चलाने के लिए रेजा कुली का कार्य करता था कि तभी करीब 20 दिनों पूर्व जनवरी माह में काम पर जा रहा था कि तभी कुछ नाकाब कोष लोगों द्वारा अगवा करके कही सुन  सान इलाके में ले जाकर मारपीट को अंजाम दिया गया। आगे कहती है कि मेरे बेटे को चाकू से भी हमला किया गया था। जिसके उपरांत एक नए नम्बर से मेरे नम्बर में कॉल करके जानकारी दी गई। मैं अपने अधमरे पुत्र को लेकर अस्पताल गई वहां से अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज रैफर कर दिया गया। मेडीकल  कॉलेज में 21 जनवरी को भर्ती की जहां ईलाज चला। जिसके बाद 2 फरवरी को अस्पताल ने डिस्चार्ज कर दिया। अस्पताल ने शासन से मिलने वाले आयुष्मान कार्ड इलाज चला, डॉ ने बाहर से दवाई खरीदने के लिए लिख दिया है। 

अम्बिकापुर में इलाज कराकर घर लाई हूं। इस बीच थाना गई वहां से मुझे वापस लौटा दिया गया। न्ययालय से दस्तावेज बनाकर थाना ले गई। तब भी थाना कोतवाली के स्टाफ द्वारा बगैर रिसीप लिए ही भेज दिया गया। जिसके 23 दिन बाद 11 फरवरी को पुलिस वाले आकर बयान लिए है। बच्चा घर में है, माँ कहती है कि दरिंदो ने बच्चे को गुप्तांग तक आग से जला डाला है। बच्चे के आधा शरीर हाथ जला हुआ है। बच्चा जलन से रोते रहता है। दिन भर हवा देती रहती हूं। घर की स्थिति ठीक नहीं है। नहीं तो बाहर ले जाकर दिखवाती। बच्चे का जख्म कच्चा है। दर्द से कराहता रहता है। सुध लेने कोई नहीं आया है।

कहती है कि कोई आर्थिक सहयोग करता तो मेरे बच्चे के ईलाज बेहतर जगह कराती। बच्चा बड़ा है। इसके बाद भी मल मूत्र बिस्तर में ही कर रहा है। 

जबकि जले हुए बर्न के मामलों में इन्फ़ेक्सन बढ़ने का खतरा बना रहता है। इसके बाद भी प्रशासन द्वारा घर में रखवाकर ईलाज के लिए दवाई चलवाना लापरवाही साफ झलक रहा है। 

जबकि जिला मुख्यालय के कोतवाली थाना क्षेत्र में इतनी बड़ी घटना घट गई और पुलिस सोती रही। पुलिस को बच्चे को मारने की कोसीस करने वाले नाकाब कोष लोगो का पता नहीं लगा पाई है। जिले से लायन आर्डर की स्थिति इस घटना से देख सकते है। जबकि क्लेक्टर के पास स्वयं के फंड से बर्न केस का इलाज कराया जा सकता है। जिसके बाद भी मौन साधे हुए है। 

इस सम्बंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर ने कहा कि  कल ही जानकारी मिली थी। आवेदन आया है महिला का जांच की जा रही है। जांच उपरांत कार्यवाही की जाएगी।