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1971 के युद्ध के हीरो मेजर जयरामसिंह ने बताई युद्ध की आंखों देखी

1971 के युद्ध के हीरो मेजर जयरामसिंह ने बताई युद्ध की आंखों देखी

झुंझुनू। 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के हीरो झुंझुनू जिले के मेजर जयरामसिंह ने विजय दिवस के मौके पर अपनी जुबानी युद्ध की कहानी शहीद स्मारक में बताई।

1971 में भारत पाकिस्तान के युद्ध में शेखावाटी के 168 जवान शहीद हुए थे। जिनमें से सर्वाधिक 108 जवान झुंझुनू के थे। लड़ाई में शामिल झुंझुनू के सैनिकों में से कई सैनिक आज भी उस मंजर को याद करते है तो उनका खून खौल उठता है।

झुंझुनू के मेजर जयरामसिंह जब साढ़े 18 साल के थे और सेना में भर्ती हुए थे। उससे छह महीने बाद ही 1971 का युद्ध हो गया था। जयरामसिंह बताते है कि उस वक्त पूर्वी और पश्चिम पाकिस्तान हुआ करता था। पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेशियों को यातनाएं दी जाती थी। भारतीय सेना ने दखल दी तो युद्ध हुआ और बांग्लादेश का जन्म हुआ।

उन्होंने बताया कि उन्होंने पश्चिम पाकिस्तान में रहते हुए 1971 की लड़ाई लड़ी। यह लड़ाई भारतीय सेना के पराक्रम की विजयी गाथा है। उस वक्त एक साथ भारतीय सेना ने ना केवल 93 हजार सैनिकों को आत्म समर्पण करवाया। बल्कि पाकिस्तानी चीफ ने टेबल पर हथियार रखकर आत्म समर्पण भी किया। यह युद्ध उन्हें इसलिए भी याद है। क्योंकि उनके हमनाम का एक साथी उनके साथ पढ़ा था। फौज में भर्ती हुआ था। साथ ही 1971 की लड़ाई में एक जयराम, वे खुद पश्चिम पाकिस्तान में दुश्मनों को जवाब दे रहे थे।

मेजर जयरामसिंह ने बताया कि आज भी युद्ध की याद आती है तो खून खौल उठता है। जब उन्होंने 1971 की लड़ाई लड़ी। तब उन्हें फौज में भर्ती हुए मात्र छह महीने ही हुए थे। उन्हें केवल हथियार चलाने और युद्ध की ट्रेनिंग दी जा रही थी। उसी वक्त युद्ध हो गया और उन्हें बॉर्डर पर लड़ने के लिए भेज दिया। लेकिन उन्हें आज भी अच्छी तरह वे 14 राजपुताना राइफल्स बटालियन में थे और जब उन्होंने पाकिस्तान की चैकी पर हमला करने के लिए चढाई की तो पाकिस्तान सेना में भगदड़ मच गई और वे भाग गए कि भारतीय आ गए।

गौरतलब है कि 1971 का युद्ध करीब 13 दिन चला। इस युद्ध में देश के करीब 3900 जवान शहीद हुए। जिनमें सर्वाधिक जवान शेखावाटी के थे। जिनकी संख्या 168 थी। इनमें भी झुंझुनू के 108, सीकर के 46 तथा चूरू के 12 जवान शामिल थे। शहादत देने वालों में जाबासर के दो भाई भी शामिल थे।