breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -पाठशाला खुलवा दो महाराज

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -पाठशाला खुलवा दो महाराज

सुभाष मिश्र, प्रधान संपादक

कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की एक कविता है-
पाठशाला खुलवा दो महाराज, मोर जिया पढऩे को चाहे
आम का पेड़ ये, ठूंठे का ठूंठा, काला हो गया, हमर अंगूठा
यह कालिख हटा दो महाराज, मोर जिया लिखने को चाहे।

यह कविता शोषण, अंधविश्वास और अत्याचार के खिलाफ शिक्षा के महत्व को प्रतिपादित करने बहुत पहले लिखी गई थी। उस दौर से आज का दौर आते-आते गांव-गांव में पाठशाला खुली, शिक्षा का अधिकार मिला और वंचित वर्ग को पढऩे-लिखने के अवसर मिले किंतु कोरोना संक्रमण के कारण करीब एक साल से स्कूल, कालेज बंद है। दिल्ली सरकार ने 24 मार्च से बंद स्कूलों को 18 जनवरी से खोलने का निर्णय लिया है। बोर्ड की परीक्षाओं को ध्यान में रखकर 10वीं और 12वीं के छात्रों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पचास फीसदी क्षमता के साथ माता पिता की सहमति से स्कूल आने की अनुमति रहेगी। दिल्ली में बोर्ड की परीक्षा 4 मई से शुरु होने जा रही है। इसी बीच 16 जनवरी से देश के फ्रंटलाईन कार्यकर्ताओं का कोरोना टीकाकरण शुरु होने जा रहा है। करीब तीन करोड़ लोगों को पहले चरण में टीके लगाए जाएंगे। इस टीकाकरण में छात्र-छात्राएं शामिल नहीं है।

गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों के निर्णय के अनुसार, 2020 में देश के स्कूलों और कॉलेजों को फिर से खोलने की अनुमति दी थी। भारत में कोविड-19 के मामले कम हो रहे हैं, देश भर के कई राज्य कई महीनों तक बंद रहने के बाद कक्षाएं फिर से शुरू करने और स्कूलों को फिर से खोलने जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में अभी स्कूल कालेज शुरू नहीं हुए हैं। यहां ऑनलाईन क्लासें चल रही हैं। यूपी सरकार ने कक्षा नौ से 12 तक के स्कूल सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक खोलने का निर्देश दिए हंै। तेलंगाना के स्कूल और कॉलेज 1 फरवरी, 2021 से राज्य में फिर से खुलेंगे। महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने कहा कि राज्य सरकार 50 प्रतिशत क्षमता वाले कॉलेजों को फिर से खोलने के बारे में 20 जनवरी तक निर्णय लेगी। कर्नाटक, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों ने पहले ही कक्षाएं शुरू कर दी है। कोविड -19 महामारी के चलते मार्च 2020 से स्कूल और कॉलेज बंद है। सरकार ने जारी दिशा-निर्देशों में स्कूलों को 15 अक्टूबर से फिर से खोलने की अनुमति देते हुए यह फैसला राज्यों पर छोड़ दिया गया था।  सीबीएसई कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2021 के लिए तिथि पत्र की घोषणा की थी।  

एक समय था जब गर्मियों की छुट्टी के बाद स्कूल-कालेज खुलते थे तो साथियों से मिलने का उत्साह, छुट्टियों में क्या कुछ किया, गुल खिलाए बताने की उत्सुकता बनी रहती थी। कस्बे के स्कूल-कालेजों में जहां को-एजुकेशन के कारण लड़के- लड़कियों के मिलने का एकमात्र स्थान स्कूल कालेज होता है, वहां पर उसके खुलने की खुशी देखते ही बनती है। मैं तुझसे मिलने आई मंदिर जाने के बहाने काम नहीं करते तब ज्ञान का मंदिर ही मिलने का एकमात्र विश्वसनीय और सुरक्षित स्थान होता है। कौन मां बाप है जो अपने बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहेंगे। शिक्षा के बहुत से फायदे हैं ये लोगों को स्कूल कालेज पता चलता है कोरोना संक्रमण के चलते जब से स्कूल-कालेज बंद है तब से बच्चों के साथ-साथ माता-पिता पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है। आखिर घर की चारदीवारी में इन्हें कैसे कब रोकें। ऑनलाईन क्लास के नाम पर बच्चे क्या लिख पढ़ रहे हैं माता-पिता को पता नहीं। लोग वर्चुअल दुनिया से उकताकर रियल दुनिया में आने बेताब हैं। स्कूल कालेज का खुलना केवल पढ़ाई-लिखाई का व्यवस्थित हो जाना मात्र नहीं है। यह जीवंत संबंधों का का नवीनकरण भी है। सभी को कोरोना वैक्सीन के साथ साथ अब स्कूल कालेज खुलने की प्रतीक्षा है। देश के उन नौनिहालों में भी स्कूल खुलने की उत्सुकता है जिन्हें भरपेट भोजन नहीं मिलता। स्कूल जाने पर गर्म-गर्म मध्यान्ह भोजन के जरिये पेट की आग बुझाने वाले बच्चे भी स्कूल खुलने की बाट जोह रहे हैं। कोरोना काल के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यों को स्कूल बंद होने के दौरान मिड डे मिल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में अग्रिम पहल करके पूरे देश में नाम कमाया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 21 मार्च 2020 को सभी कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारियों को सूखा राशन वितरण करने के निर्देश दे दिए। कोरोना काल में 43 हजार स्कूलों के 29 लाख बच्चों को सूखा राशन वितरण किया जा रहा है। पढ़ई तुंहर दुआर योजना के जरिए 23 लाख से अधिक बच्चे ऑनलाईन क्लास, लाऊडस्पीकर के जरिये पढ़ाई का लाभ ले रहे हैं। कोरोना काल में सुरक्षा निर्देशों का पालन कर बच्चों को जनभागीदारी से एलईडी स्क्रीन और पढ़ाने के अन्य उपकरण, पाठन सामग्री जुटाकर नवाचार की नई इबारत लिखने वाले शिक्षकों की बदौलत जहां बड़े-बड़े महानगरों में पढ़ाई-लिखाई बंद रही वहीं दूरस्थ गांवों में भी बच्चों ने पढऩा-लिखना जारी रखा।  

कोरोना संक्रमण के दौरान बहुत से निजी स्कूलों ने अपनी फीस के लिए जब अभिभावकों पर दबाव बनाया तो वे सरकार के पास गये, कोर्ट गये। अभिभावकों को फौरी राहत मिली किंतु स्कूलों ने अपने शिक्षकों और स्टॉफ के वेतन और अन्य खर्चों को लेकर फीस लेना जारी रखा। ऐेसे स्कूल जहां एडमिशन बमुश्किल या सिफारिश से होता है, वहां पढऩे वाले बच्चों के अभिभावक तो नियमित फीस पढ़ाते रहे किंतु जो औसत दर्जे के नामी गिरामी स्कूल नहीं थे वहां पढऩे वाले बच्चों के माता-पिता ने फीस देना बंद कर दिया। कोरोना संकट के चलते बहुत सारे स्कूल बंद होने की कगार पर आ गये हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ई तुंहर दुआर योजना के जरिये लगातार छात्रों को पढ़ाने की बात कही जा रही है किन्तु बहुत सारे लोगों का कहना है कि सही नेटवर्क नहीं मिलने और जुगाड़ कल्चर के कारण प्रभावी तरीके से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। अब जब सभी मॉल, सिनेमा हाल और आयोजन होने लगे हैं तब अभिभावक भी चाहते हैं कि बच्चे स्कूल जायें। घर में बैठे-बैठे बच्चे भी अब बोर होने लगे हैं।  

कोरोना काल में जहां एक ओर स्कूलों के दरवाजे बंद रहे वहीं दूसरी ओर इनमें नहीं के बराबर एडमिशन हुए हैं। बहुत से स्कूलों के पास स्कूल संचालन का संकट ज्ञान खड़ा हुआ है। अकेले रायपुर में 11 प्रायमरी और मीडिल स्कूलों के प्रबंधक ने शिक्षा विभाग को पत्र देकर अगले सत्र से स्कूल चलाने में असमर्थता जाहिर की है। पूरे छत्तीसगढ़ में सौ से ज्यादा निजी स्कूल ऐसे हैं जो अगले सत्र से संचालित नहीं होना चाहते। बहुतों ने किराये के भवन जहां से स्कूल संचालित 3 हजार से अधिक सरकारी स्कूल आपस में मर्ज हुए हैं। निजी स्कूलों पर आई आर्थिक विपदा को दूर करने के लिए राज्य शासन ने कुछ हद तक पहल की है। शासन की ओर से शिक्षा के अधिकार नियम के तहत निजी स्कूलों में भर्ती कराए गए बच्चों की फीस के रुप में 4473 निजी स्कूलों के खाते में 101 करोड़ रुपए जमा कराए हैं।

इंग्लिश मीडियम के 50 से अधिक सरकारी अंग्रेजी स्कूल खोले गए हैं जहां एडमिशन कराने वालों के लिए होड़ है। प्रायवेट स्कूलों की तुलना में सस्ती और अच्छी शिक्षा, योग्य शिक्षकों का स्टाफ, स्कूलों में अत्याधुनिक लाईब्रेरी, कंप्यूटर और साइंस लैब की सुविधाओं को देखते हुए सरकारी स्कूलों के प्रति रुझान बढ़ा है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा संचालित 52 शासकीय अंग्रेजी मीडियम स्कूल स्वामी आत्मानंद के नाम से खोले गए हैं। महज दो-तीन महीनों के भीतर करीब 60-65 हजार आवेदन आए लेकिन एडमिशन सिर्फ 28,000 छात्रों को एडमिशन मिला है। देखते हैं आने वाले समय में कोरोना क्या रुख दिखाता है। स्कूल-कालेज और बाकी जनजीवन बिना भय, मास्क और सैनेटाइजेशन के पटरी पर आये तभी सही में पहले जैसी रौनक लौटेगी।