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बिग ब्रेकिंग : रिजर्व बैंक का ऐलान..छोटे व्यापारियों को केवाईसी नियमों में छूट..इमर्जेंसी हेल्थ सेवाओं को लिए 50000 करोड़ का लोन..आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने की घोषणा..जानिए और क्या क्या..!

बिग ब्रेकिंग : रिजर्व बैंक का ऐलान..छोटे व्यापारियों को केवाईसी नियमों में छूट..इमर्जेंसी हेल्थ सेवाओं को लिए 50000 करोड़ का लोन..आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने की घोषणा..जानिए और क्या क्या..!

देश में कोरोना संकट के बीच आज भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोरोना का दूसरी लगह पहले से कहीं ज्यादा घातक है और इसका इकोनॉमी पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए दास ने कहा कि केवाईसी को लेकर भी रिजर्व बैंक ने बड़ी छूट देते हुए विडियो केवाईसी उर नाॅन फेस टू फेस डाॅक्यूमेंट को बढ़ावा देने को कहा।

उन्होंने कहा कि आरबीआई इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर के बाद इकोनॉमी ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया और अच्छी रिकवरी देखने को मिली। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर को रोकने के लिए कई राज्यों में लॉकडाउन और अन्य प्रेरित प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचने की आशंका है। आरबीआई ने बैंकों को प्रायोरिटी सेक्टर के लिए कोविड लोन बुक बनाने के लिए कहा है।

शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के चलते ग्रोथ के अनुमान घट सकते हैं। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर अभी तक ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ऑटो सेक्टर में अच्छी रिकवरी देखने को मिली है। ट्रैक्टर सेगमेंट ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोरोना संकट की जरूरत को देखते हुए इमर्जेंसी हेल्थ सेवाओं को लिए 50000 करोड़ का लोन दिया जाएगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा, दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत में तेज रिकवरी हुई। मौसम विभाग ने इस साल सामान्य मॉनसून रहने अनुमान जताया है। अच्छे मॉनसून से ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में तेजी रहने की संभावना है।

आरबीआई ने कोरोना के बीच केवाईसी नियमों में छूट दी है। इससे छोटे वयापारियों को फायदा होगा. इसके साथ ही डिजीलॉकर और अन्य डिजिटल माध्यम से केवाईसी करवाने को भी मंजूरी दे दी है।

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप और उसके चलते कई राज्यों तथा शहरों में लागू लॉकडाउन के मद्देनजर वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के पूर्वानुमान को 11.7 प्रतिशत से घटाकर 11.1 प्रतिशत कर दिया है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर भयानक रूप ले चुकी है और इस बीमारी से अब तक 2.22 लाख लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हर दिन संक्रमण के 3.5 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं। इस कारण पूरे देश में सख्त लॉकडाउन की मांग भी जोर पकड़ने लगी है, हालांकि आर्थिक नुकसान को देखते हुए मोदी सरकार ने अभी तक इस कदम से परहेज किया है।

गोल्डमैन सैक्स ने एक रिपोर्ट में कहा कि लॉकडाउन की तीव्रता पिछले साल के मुकाबले कम है। फिर भी, भारत के प्रमुख शहरों में सख्त प्रतिबंधों का असर साफ दिखाई दे रहा है। शहरों में सख्त लॉकडाउन से सेवाओं पर खासतौर से असर पड़ा है। इसके अलावा बिजली की खपत, और अप्रैल में विनिर्माण पीएमआई के स्थिर रहने से विनिर्माण क्षेत्र पर असर पड़ने के संकेत भी मिल रहे हैं।

क्षेत्रों में इनपुट मूल्य दबावों का निर्माण, उन्नत वैश्विक कमोडिटी की कीमतों के हिस्से में संचालित एक चिंता का विषय है। वर्ष के बाकी हिस्सों में मुद्रास्फीति की गति कोविद -19 संक्रमणों और स्थानीय नियंत्रण उपायों और चेन और लॉजिस्टिक्स पर प्रभाव से प्रभावित होगी।

खास बातें :
अन्य कोरोना पीड़ित देशों के मुकाबले भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है
अप्रैल में रेल माल ढुलाई में 76% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
अप्रैल में टोल संग्रह में गतिशीलता में गिरावट आई लेकिन अप्रैल 2020 के दौरान अचानक तेज वृद्धि
ट्रैक्टर सेगमेंट में जारी है तेज रफ्तार:
सामान्य मानसून में खाद्य मूल्य दबावों को शामिल करने में मदद करनी चाहिए, खासकर अनाज और दालों में।
अप्रैल 2021 में भी मर्चेंडाइज इंपोर्ट और एक्सपोर्ट मजबूत ग्रोथ परफॉर्मेंस का गवाह रहा।
आईएमडी द्वारा सामान्य मानसून का पूर्वानुमान 2021-22 में ग्रामीण मांग और समग्र उत्पादन को बनाए रखने की उम्मीद है, जबकि मुद्रास्फीति के दबाव पर भी सुखद प्रभाव पड़ता है: आरबीआई गवर्नर