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नेत्र शरीर का बहुमूल्य अंग, लापरवाही पड़ सकती है भारी : डॉ. अभिषेक पाउल

नेत्र शरीर का बहुमूल्य अंग, लापरवाही पड़ सकती है भारी :  डॉ. अभिषेक पाउल

मधुमेह के मरीजों में ग्लुकोमा की बीमारी समय पर इलाज नहीं कराने पर पड़ सकती है भारी 

रायपुर। नेत्र मानव शरीर का महत्वपूर्ण अंग है नेत्रों के जरियो ही हम सारी दुनिया को देखते हैं। प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन एक नेत्रधारी जिस तरह से कर सकता है उस तरह से नेत्रहीन वर्णन नहीं कर सकता। नेत्रों से संबंधित बीमारी बच्चों में बाल्यकाल से ही प्रारंभ हो जाती है। कई बार माता पिता की जानकारी में यह बात नहीं होने पर नेत्र संबंधी विकार का सामना करना पड़ता है।

आंखों की बीमारियां जीवनशैली में बदलाव के कारण लगातार बढ़ रहे हैं। लम्बे समय तक लगे कोरोना काल में ऑनलाईन कक्षाओं में भाग लेने वाले विद्यार्थी, एयर कंडिशन में रहन-सहन, वर्क फ्राम, होम कल्चर, आंखों का कॉन्टेक्ट मोबाइल/कम्प्यूटर स्क्रीन में लगातार काम करने के कारण आंखें ड्राई हो जाती है। जिसके चलते मायोपिया की शिकायत बढ़ते जा रही है। उक्त जानकारी प्रेस क्लब रायपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में ए.बी. सुपर स्पेशिलिटी आई हॉस्पिटल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक पाउल एवं डॉ. बिजिता देब ने संयुक्त रूप से दी। 

पत्रकारवार्ता में नेत्र विशेषज्ञों ने बताया कि 28 नवम्बर से अवंती विहार एटीएम चौक के पास शुरू किया गया है। ओपीडी शुल्क 300 रूपये हैं। गरीब मरीजों के लिए उनके अस्पताल में विशेष रियायत है। उन्होंने बताया कि हमारे देश में अंधेपन का मुख्य कारण अवोईडाबले/प्रेवैटाब्ले/ब्लाइंडनेस जिसमें मोतियाबिंद काली पुतली की सफेदी उन्कोर्रेक्टेड विर्रोर्स इत्यादि बीमारियां है जिनका इलाज उनके हास्पिटल में विशेष रूप से किया जाता है।

उन्होंने मधुमेह बीमारी के संबंध में भारत का दूसरे नंबर पर स्थान बताते हुए शुगर बढऩे के कारण ग्लुकोमा नामक खतरनाक बीमारी का समय इलाज नहीं होने पर अंधे होने की संभावना जताई नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार चश्मा उतारने की विधि डॉ. बिजिता के माध्यम से कुशलता पूर्वक सम्पन्न की जाती है। 50 साल से अधिक उम्र के स्त्री पुरूष को रेटिना चेकअप हमेशा कराते रहना चाहिए। उन्होंने भविष्य में नि:शुल्क नेत्र शिविर के जरिये राजधानीवासियों की सेवा करने की इच्छा जताई।